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Delhi News: जेएनयू में प्रशासनिक पारदर्शिता की स्थिति चिंताजनकः एबीवीपी
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चुनाव को लेकर सचिव और संयुक्त सचिव ने एजेंडा किया प्रस्तुत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रसंघ चुनाव को लेकर एबीवीपी के महासचिव और संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवारों ने अपना एजेंडा प्रस्तुत किया। महासचिव पद के उम्मीदवार राजेश्वर कांत दुबे ने कहा कि जेएनयू में छात्र अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता की स्थिति चिंताजनक है।
एबीवीपी मानती है कि किसी भी लोकतांत्रिक परिसर में संवाद और जवाबदेही सबसे आवश्यक है। प्रशासनिक निर्णयों में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करना और सीपीओ मैनुअल जैसे असंवेदनशील प्रावधानों की समीक्षा कराना हमारी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता की कमी और कई स्तरों पर जवाबदेही का अभाव देखने को मिला है। एबीवीपी यह सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में स्पष्टता हो और हर निर्णय छात्रों के हित में लिया जाए। एबीवीपी का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं बल्कि समाधान देना है।
एबीवीपी से संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार अनुज ने कहा कि जेएनयू के छात्रों में अपार प्रतिभा है लेकिन संसाधनों की कमी के कारण वह अपनी पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुंच पाते। एबीवीपी इस स्थिति को बदलना चाहती है। हमारा संकल्प है कि विश्वविद्यालय में स्पोर्ट्स कोटे को लागू किया जाए। खेल मैदानों और जिम सुविधाओं का नवीनीकरण हो और खेलों को जेएनयू की पहचान के रूप में पुनर्स्थापित किया जाए। एबीवीपी जेएनयू के केंद्रीय चुनाव समन्वयक अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि हम वामपंथी विचारधारा की नकारात्मकता नहीं, राष्ट्रवादी विचारधारा और विकास की दिशा में संगठित प्रयास चाहते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रसंघ चुनाव को लेकर एबीवीपी के महासचिव और संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवारों ने अपना एजेंडा प्रस्तुत किया। महासचिव पद के उम्मीदवार राजेश्वर कांत दुबे ने कहा कि जेएनयू में छात्र अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता की स्थिति चिंताजनक है।
एबीवीपी मानती है कि किसी भी लोकतांत्रिक परिसर में संवाद और जवाबदेही सबसे आवश्यक है। प्रशासनिक निर्णयों में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करना और सीपीओ मैनुअल जैसे असंवेदनशील प्रावधानों की समीक्षा कराना हमारी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता की कमी और कई स्तरों पर जवाबदेही का अभाव देखने को मिला है। एबीवीपी यह सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में स्पष्टता हो और हर निर्णय छात्रों के हित में लिया जाए। एबीवीपी का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं बल्कि समाधान देना है।
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एबीवीपी से संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार अनुज ने कहा कि जेएनयू के छात्रों में अपार प्रतिभा है लेकिन संसाधनों की कमी के कारण वह अपनी पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुंच पाते। एबीवीपी इस स्थिति को बदलना चाहती है। हमारा संकल्प है कि विश्वविद्यालय में स्पोर्ट्स कोटे को लागू किया जाए। खेल मैदानों और जिम सुविधाओं का नवीनीकरण हो और खेलों को जेएनयू की पहचान के रूप में पुनर्स्थापित किया जाए। एबीवीपी जेएनयू के केंद्रीय चुनाव समन्वयक अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि हम वामपंथी विचारधारा की नकारात्मकता नहीं, राष्ट्रवादी विचारधारा और विकास की दिशा में संगठित प्रयास चाहते हैं।
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