मरम्मत के लिए आई मर्सिडीज लेकर महिला मित्रों के साथ घूमने निकला था मैकेनिक, ऑटो और तीन राहगीरों को मारी टक्कर
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सराय काले खां इलाके में सोमवार को मर्सिडीज कार ने तीन लोगों को टक्कर मार दी। कार ने पहले ऑटो को टक्कर मारी, इसके बाद पैदल चल रहे लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। ऑटो ड्राइवर सचिन इस हादसे में बाल-बाल बच गया। तीनों घायलों को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। पुलिस ने आरोपी कार चालक आलम को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मर्सिडीज कार जब्त कर ली है।
पुलिस के अनुसार आरोपी सीलमपुर में कार मैकेनिक है और वर्कशॉप में मरम्मत के लिए आई कार लेकर मौज मस्ती के लिए कालकाजी गया था। घटना के वक्त उसके साथ दो महिला मित्र भी मौजूद थीं। सूत्रों का कहना है कि घटना के वक्त कार चालक व लड़कियां नशे में थीं। कार से बीयर की बोतलें व अन्य सामान मिला है।
दक्षिण-पूर्वी जिला डीसीपी आरपी मीणा ने बताया कि पुलिस को सराय काले खां रेड लाइट के नजदीक एक मर्सिडीज कार और ऑटो क्षतिग्रस्त हालत में मिले। जांच में पता चला कि पहले कार ने ऑटो को टक्कर मारी थी। इसके बाद कार चालक ने वहां से भागने का प्रयास किया और इसमें कार बेकाबू हो गई और पैदल चल रहे तीन लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। घायलों के नाम ब्रिजेश, महेन्द्र व सुरेश हैं।
शराब पीकर गाड़ी चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं में आई कमी
देश की राजधानी दिल्ली में रोजाना सड़क दुर्घटनाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन राहत की बात है कि 2019 में शराब पीकर गाड़ी चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2018 में 333 ऐसी घटनाएं दर्ज की गई थीं जबकि 2019 में यह आंकड़ा 215 रहा। वहीं वर्ष 2017 की बात करें तो ऐसे हादसों की संख्या 124 थी।
आमतौर पर सड़क दुर्घटनाओं का कारण तेज रफ्तार या नशे की हालत में गाड़ी चलाना माना जाता है। वर्ष 2018 में दिल्ली में कुल साढ़े छह हजार सड़क हादसे दर्ज किए गए थे, जिनमें 1600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2019 में करीब 7200 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें दो हजार लोगों की मौत हुई। इन आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में सड़क हादसों की वजह से रोजाना औसतन 5 लोगों की मौत हो रही है।
वहीं सेव लाइफ फाउंडेशन के अनुसार इस वर्ष कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान भी राजधानी में कुछ दुर्घटनाएं देखने को मिलीं। इनमें 5 लोगों की मौत हुई। जबकि लॉकडाउन के दौरान पूरे देश में 750 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 198 मजदूरों की मौत हुई।