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मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी से पीड़ित भाई-बहन ने लगाई इलाज की गुहार
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नई दिल्ली। जानलेवा बीमारी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी यानी मांसपेशी विकार से पीड़ित भाई-बहन ने समुचित इलाज की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को मेडिकल टीम गठित करने व टीम को उनकी बीमारी की जांच और दशा का आकलन के लिए उनके घर भेजने की गुहार लगाई है।
अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने पीड़ित भाई बहन की ओर से दायर याचिका में अदालत से आग्रह किया है कि उनके मुवक्किलों की चिकित्सा जांच के लिए उनके घर पर ही फिजियोथैरेपी, अक्यूपेशनल थैरेपी और हाइड्रो थैरेपी मुहैया कराने का आदेश दिया जाए।
उन्होंने कहा है कि यदि ये थैरेपी मरीज के घर के बजाय किसी अन्य जगह दी जाती है तो इसके लिए वहां आने-जाने के लिए परिवहन की समुचित प्रबंधन करने का भी निर्देश दिया जाए क्योंकि दोनों बच्चों की मां घरेलू सहायिका का काम करती है और वह यह खर्च वहन करने में असमर्थ है।
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याचिकाकर्ता रोजालीनी परिदा और उसके भाई राकेश परिदा दोनों मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित है। उन्होंने कहा है राष्ट्रीय दिव्यांगता कानून 2016 के तहत इस बीमारी को स्थाई दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया है। वह बिना किसी की मदद के कोई भी कार्य नहीं कर पाते है। साथ ही कहा कि दोनों बच्चे अपनी विधवा मां पर आश्रित हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह बच्चे का समुचित इलाज और सर्पोट नहीं कर पा रही हैं।
याचिका में संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता गुणवत्तापूर्ण जीवन के अधिकारी हैं। ऐसे में सरकार को उनकी मदद के लिए निर्देश दिए जाएं। दोनों बच्चों को एनर्जी सप्लीमेंट भी मुहैया कराने का आदेश केंद्र और दिल्ली सरकार को देने की मांग की है।
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अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने पीड़ित भाई बहन की ओर से दायर याचिका में अदालत से आग्रह किया है कि उनके मुवक्किलों की चिकित्सा जांच के लिए उनके घर पर ही फिजियोथैरेपी, अक्यूपेशनल थैरेपी और हाइड्रो थैरेपी मुहैया कराने का आदेश दिया जाए।
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उन्होंने कहा है कि यदि ये थैरेपी मरीज के घर के बजाय किसी अन्य जगह दी जाती है तो इसके लिए वहां आने-जाने के लिए परिवहन की समुचित प्रबंधन करने का भी निर्देश दिया जाए क्योंकि दोनों बच्चों की मां घरेलू सहायिका का काम करती है और वह यह खर्च वहन करने में असमर्थ है।
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याचिकाकर्ता रोजालीनी परिदा और उसके भाई राकेश परिदा दोनों मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित है। उन्होंने कहा है राष्ट्रीय दिव्यांगता कानून 2016 के तहत इस बीमारी को स्थाई दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया है। वह बिना किसी की मदद के कोई भी कार्य नहीं कर पाते है। साथ ही कहा कि दोनों बच्चे अपनी विधवा मां पर आश्रित हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह बच्चे का समुचित इलाज और सर्पोट नहीं कर पा रही हैं।
याचिका में संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता गुणवत्तापूर्ण जीवन के अधिकारी हैं। ऐसे में सरकार को उनकी मदद के लिए निर्देश दिए जाएं। दोनों बच्चों को एनर्जी सप्लीमेंट भी मुहैया कराने का आदेश केंद्र और दिल्ली सरकार को देने की मांग की है।