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25 दिन बाद भी नहीं बदले हालात: दिल्ली में अब भी बिस्तरों की मारामारी, प्लाज्मा ने भी बढ़ाई टेंशन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 05 May 2021 11:21 PM IST

सार

दिल्ली में मरीजों की आफत कम नहीं हो रही है। अभी तक अस्पतालों में बिस्तरों की मारामारी चल रही है। वहीं अब ऑक्सीजन और अन्य संसाधनों के अलावा प्लाज्मा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। 
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कोरोना वार्ड - फोटो : amar ujala
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विस्तार

दिल्ली में मरीजों की आफत कम नहीं हो रही है। अभी तक अस्पतालों में बिस्तरों की मारामारी चल रही है। वहीं अब ऑक्सीजन और अन्य संसाधनों के अलावा प्लाज्मा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। आईसीएमआर के अनुसार कोरोना वायरस के उपचार में प्लाज्मा थैरेपी का बहुत अधिक असर नहीं मिला है। इससे किसी मरीज की मौत को रोका नहीं जा सकता है। इसके बाद भी दिल्ली-एनसीआर में डॉक्टर प्लाज्मा थैरेपी के लिए तीमारदारों को सलाह दे रहे हैं। हालात इस कदर हैं कि प्लाज्मा दाता भी लोगों को नहीं मिल पा रहे हैं जिसकी वजह से तीमारदारों की मुसीबत फिर से बन गई है। 
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रोहिणी निवासी मनीष यादव का कहना है कि पहले मरीज को भर्ती कराओ, फिर ऑक्सीजन, रेमडेसिविर, टोसिलिजुमैब, फेविपिराविर जैसी दवाओं के लिए धक्के खाओ। यह सब उपलब्ध कराने के बाद भी मरीज पर असर नहीं होता तो डॉक्टर प्लाज्मा दाता को तलाशने के लिए कहते हैं। ऐसे में तीमारदारों की मुसीबत सबसे अधिक है। वह भी तब जब उनके संक्रमित होने का खतरा भी बरकरार रहता है। 


दरअसल दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल में सरकार ने देश का पहला प्लाज्मा बैंक तैयार किया था लेकिन यहां से प्लाज्मा तभी दिया जाएगा जब आपके पास कोई दाता हो। प्लाज्मा वही व्यक्ति दे सकता है जो 14 दिन पहले निगेटिव हुआ हो। या फिर पिछले तीन महीने के दौरान संक्रमित होकर स्वस्थ्य हुआ हो। ऐसे व्यक्तियों को तलाशने के बाद उन्हें अस्पताल में आकर प्लाज्मा दान करने की अपील की जा रही है लेकिन समस्या एक और बड़ी यह है कि अस्पतालों में जिस तरह की स्थिति देखने को मिल रही है उसकी वजह से लोग अस्पताल जाने से भी घबरा रहे हैं। 

जानकारी के अनुसार पिछले माह 13 अप्रैल से राजधानी के अस्पतालों में बिस्तरों की कमी है। प्राइवेट अस्पतालों ने हर दिन बेड खाली होने की जानकारी देना तक सरकार को बंद किया हुआ है। वहीं सरकार को जो नंबर अस्पतालों ने दिए हैं वह भी फर्जी हैं जिन पर लोगों को मदद नहीं मिल पा रही है। रेमडेसिविर सहित अन्य तमाम उपकरण और दवाओं के लिए भी लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। फिलहाल हालात दिल्ली के सरकारी और प्राइवेट दोनों ही तरह के अस्पतालों में देखने को मिल रहे हैं। 
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