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जैव विविधता दिवस: दिल्ली के 921 एकड़ भू-भाग को जीवन दे रहे हैं सात जैव विविधता पार्क
Sat, 22 May 2021 05:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 22 May 2021 05:30 AM IST
सार
- अरावली जैव विविधता पार्क 280 एकड़ के हिस्से को दे रहा हरियाली
- दिल्ली में न सिर्फ हरियाली बढ़ी है बल्कि विभिन्न जीव जंतुओं की संख्या में भी वृद्धि देखने को मिली है
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बायोडायवर्सिटी पार्क, वजीराबाद
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राजधानी को हरी-भरी दिल्ली यूं ही नहीं कहा जाता है। इसके लिए दिल्ली के सात जैव विविधता पार्क भी अपनी भूमिका अदा कर 921 एकड़ जमीन को हरा-भरा करने काम कर रहे हैं। यही नहीं पिछले एक दशक से भी अधिक में दिल्ली में न सिर्फ हरियाली बढ़ी है बल्कि विभिन्न जीव जंतुओं की संख्या में भी वृद्धि देखने को मिली है। दिल्ली में विभिन्न प्रकार के जीव जंतुओं और पौधों को आश्रय देने के लिए सात जैव विविधता पार्क हैं। इसमें 280 एकड़ के साथ अरावली जैव विविधता पार्क पशु- पक्षियों व हरियाली के लिए सबसे बड़ा आश्रय है।
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इसके अलावा 184 एकड़ के साथ यमुना जैव विविधता पार्क, 130 एकड़ के साथ तुगलकाबाद जैव विविधता पार्क, 167 एकड़ के साथ कालिंदी जैव विविधता पार्क, 87 एकड़ के साथ कमला नेहरू रिज इलाका, 70 एकड़ के साथ तिलपत वैली जैव विविधता पार्क और तीन एकड़ के साथ नीला हॉज शामिल है। पिछले वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें तो जैव विविधता पार्क में विभिन्न प्रकार की पौधों की प्रजातियों में 10 से लेकर 100 फ़ीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिली है।
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यमुना जैव विविधता पार्क की बात करें तो यहां वर्ष 2002 में स्थलीय पौधों की संख्या 90 थी जो वर्ष 2020 तक 915 तक पहुंच गई। इसके अलावा जल वनस्पति की संख्या दो से बढ़कर 101 तक पहुंच गई है। यहां जीव जंतुओं की बात करें तो वर्ष 2002 में कुल 11 तितलियां पाई गई थी जबकि 2020 में इनकी संख्या 82 तक पहुंच गई है, अन्य जंतुओं की संख्या भी चार से बढ़कर 22 तक पहुंची है।
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रावली जैव विविधता में वर्ष 2005 में 150 स्थलीय पौधे पाए गए थे, जबकि 2020 तक इनकी संख्या 950 तक दर्ज की गई। यहां पहले एक भी जल वनस्पति नहीं था, लेकिन 2020 तक इनकी संख्या 31 तक पहुंच गई। तितलियों की बात करें तो इनकी संख्या में 13 से पहुंचकर 113 दर्ज की गई है। जंतुओं की संख्य पांच से 19 तक पहुंची है।
तिलपत वैली जैव विविधता पार्क में विभिन्न प्रकार के पौधों में 2015 से लेकर 2020 तक दो गुना से अधिक वृद्धि हुई है ।यहां पिछले पांच सालों में तितलियों की संख्या 21 से 55 तक पहुंच गई है। हालांकि, यहां पांच सालों में जंतुओं की संख्या में खास बदलाव नहीं हुआ है जोकि पांच से सिर्फ सात तक ही दर्ज की गई है।
कमला नेहरू रिज इलाके में पिछले पांच सालों में स्थलीय पौधों की संख्या 87 से बढ़कर 415 तक दर्ज की गई है। जल वनस्पति चार से बढ़कर 20 हुए हैं। तितलियों की संख्या 31 से बढ़कर 46 तक पहुंची है, जबकि अन्य जंतुओं की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह केवल सात ही रहे हैं।
तुगलकाबाग पार्क में भी पिछले चार साल के अंदर पौधों की संख्या 30 से बढ़कर 155 हुई है। तितलियों की संख्या 35 से बढ़कर 44 तक दर्ज की गई है। इसके अलावा कालिंदी जैव विविधता पार्क में 2020 में कुल 25 तितलियां, दो जंतु, दो मछलियां और 38 स्थलीय पौधे रिकॉर्ड किए गए हैं। नीला हौज में पिछले चार सालों में स्थलीय पौधे की संख्या 90 से 115 हुई है। तितलियों की संख्या 15 से 40 और जंतुओं में एक वृद्धि दर्ज की गई है।