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Delhi News: डोल का बाढ़ वन बचाओ, 300 किमी की साइकिल यात्रा
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। अगर हमारे जंगल खत्म हो गए, तो हम सांस भी नहीं ले पाएंगे। हम प्रधानमंत्री से बस यही कहना चाहते हैं, डोल का बाढ़ वन बचा लीजिए। यह बातें विजेंद्र शेखावत ने बृहस्पतिवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा बच्चों को भी अपनी धरती के लिए लड़ना चाहिए, क्योंकि भविष्य हमारा है। प्रधानमंत्री ने एक पेड़ मां के नाम जैसे कई पर्यावरण-हितैषी पहल शुरू की हैं। उनसे मिलकर देश का भविष्य डोल का बाढ़ मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे।
उन्होंने बताया कि उनकी दो बेटी सात साल की भाव्या और 13 वर्षीय सावी ने जयपुर स्थित डोल का बाढ़ 100 एकड़ काे बचाने के लिए 10 अगस्त 2025 को जयपुर से दिल्ली तक 300 किमी की साइकिल यात्रा प्रारंभ की। इसका उद्देश्य जंगलों की कटाई और निर्माण परियोजनाओं को रोकना है।
शेखावत ने कहा कि पिछले चार साल से उनकी दोनों बेटियां इस जंगल का दौरा करती रही हैं। पेड़ी, पक्षियों और जंगली जीवन से उनका गहरा भावनात्मक संबंध बन चुका है। उनकी प्रेरणा अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग हैं। उन्होंने बताया कि इस बार जब अप्रैल में पेड़ों की कटाई शुरू हुई, तब आंदोलन से जुड़े लोगों ने तमाम तरीके अपनाए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों सभी से मिले और धरना देने के साथ आमरण अनशन भी किया। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
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नई दिल्ली। अगर हमारे जंगल खत्म हो गए, तो हम सांस भी नहीं ले पाएंगे। हम प्रधानमंत्री से बस यही कहना चाहते हैं, डोल का बाढ़ वन बचा लीजिए। यह बातें विजेंद्र शेखावत ने बृहस्पतिवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा बच्चों को भी अपनी धरती के लिए लड़ना चाहिए, क्योंकि भविष्य हमारा है। प्रधानमंत्री ने एक पेड़ मां के नाम जैसे कई पर्यावरण-हितैषी पहल शुरू की हैं। उनसे मिलकर देश का भविष्य डोल का बाढ़ मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे।
उन्होंने बताया कि उनकी दो बेटी सात साल की भाव्या और 13 वर्षीय सावी ने जयपुर स्थित डोल का बाढ़ 100 एकड़ काे बचाने के लिए 10 अगस्त 2025 को जयपुर से दिल्ली तक 300 किमी की साइकिल यात्रा प्रारंभ की। इसका उद्देश्य जंगलों की कटाई और निर्माण परियोजनाओं को रोकना है।
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शेखावत ने कहा कि पिछले चार साल से उनकी दोनों बेटियां इस जंगल का दौरा करती रही हैं। पेड़ी, पक्षियों और जंगली जीवन से उनका गहरा भावनात्मक संबंध बन चुका है। उनकी प्रेरणा अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग हैं। उन्होंने बताया कि इस बार जब अप्रैल में पेड़ों की कटाई शुरू हुई, तब आंदोलन से जुड़े लोगों ने तमाम तरीके अपनाए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों सभी से मिले और धरना देने के साथ आमरण अनशन भी किया। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
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