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कुलपति का पद खाली, शिक्षकों को गेस्ट और कांट्रेक्ट टीचरों की दोबारा बहाली रुकी
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा पाने वाले केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली में कुलपति का पद खाली है। स्थायी कुलपति न होने के कारण विश्वविद्यालय अपने अकेडमिक फैसले नहीं ले पा रहा है। इसके कारण परीक्षा से लेकर रिजल्ट में देरी और कांट्रेक्ट व गेस्ट टीचरों की दोबारा बहाली नहीं हो पा रही है।
वहीं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 31 अगस्त तक देश के सभी विश्वविद्यालयों को अंतिम वर्ष समेत सभी छात्रों का रिजल्ट जारी करना अनिवार्य किया है।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का दर्जा पाने के दो साल बीतने के बाद भी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तर्ज पर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कुलपति प्रो. पीएन शास्त्री का कार्यकाल 2020 में पूरा हो गया था। इसके बाद उन्हें कार्यकाल विस्तार दिया गया। हालांकि जून में उन्हें पदमुक्त कर दिया गया। इसके बाद से अभी तक कुलपति पद पर नियुक्ति नहीं हुई है।
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गेस्ट और कांट्रेक्ट टीचरों के सहारे 13 कैंपस
सरकार बेशक संस्कृत को आगे बढ़ाने की बात करती हो, लेकिन धरातल पर हालात बिल्कुल अलग हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, त्रिपुरा, मुंबई, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा आदि में वर्तमान में कुल 13 कैंपस हैं। हालांकि अधिकतर कैंपस गेस्ट और कांट्रेक्ट टीचरों के सहारे ही चल रहे हैं।
नियमों के तहत कांट्रेक्ट और गेस्ट फैकल्टी को 10 महीने के बाद ब्रेक दिया जाता है। इसके बाद कुलपति की अनुमति से दोबारा बहाली होती है। कुलपति न होने से 22 मई से ब्रेक पर भेजे गए इन शिक्षकों की बहाली रुक गई है। ऐसे में इन शिक्षकों को परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठानी भी मुश्किल हो गई है। वहीं, शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
बयान
शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी है। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था का इंतजाम किया जा रहा है।
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वहीं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 31 अगस्त तक देश के सभी विश्वविद्यालयों को अंतिम वर्ष समेत सभी छात्रों का रिजल्ट जारी करना अनिवार्य किया है।
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केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का दर्जा पाने के दो साल बीतने के बाद भी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तर्ज पर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कुलपति प्रो. पीएन शास्त्री का कार्यकाल 2020 में पूरा हो गया था। इसके बाद उन्हें कार्यकाल विस्तार दिया गया। हालांकि जून में उन्हें पदमुक्त कर दिया गया। इसके बाद से अभी तक कुलपति पद पर नियुक्ति नहीं हुई है।
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गेस्ट और कांट्रेक्ट टीचरों के सहारे 13 कैंपस
सरकार बेशक संस्कृत को आगे बढ़ाने की बात करती हो, लेकिन धरातल पर हालात बिल्कुल अलग हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, त्रिपुरा, मुंबई, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा आदि में वर्तमान में कुल 13 कैंपस हैं। हालांकि अधिकतर कैंपस गेस्ट और कांट्रेक्ट टीचरों के सहारे ही चल रहे हैं।
नियमों के तहत कांट्रेक्ट और गेस्ट फैकल्टी को 10 महीने के बाद ब्रेक दिया जाता है। इसके बाद कुलपति की अनुमति से दोबारा बहाली होती है। कुलपति न होने से 22 मई से ब्रेक पर भेजे गए इन शिक्षकों की बहाली रुक गई है। ऐसे में इन शिक्षकों को परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठानी भी मुश्किल हो गई है। वहीं, शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
बयान
शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी है। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था का इंतजाम किया जा रहा है।