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Delhi: बारिश में भी नहीं रुकेंगे रेलवे के पहिये, पुरानी दिल्ली में लोहे के पुल के बगल में तैयार हुआ दूसरा पुल

Tue, 02 Jun 2026 04:28 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 02 Jun 2026 04:28 AM IST
सार

अब बारिश के मौसम में भी पुरानी दिल्ली से आने-जाने वाली ट्रेनों के पहिये नहीं थमेंगे। पहले बारिश के मौसम में यमुना के खतरे के निशान पर आते ही लोहे वाले पुल तक पानी टकराने लगता है। इस कारण पुरानी दिल्ली आने वाली ट्रेनों के पहिये थम जाते थे।

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Railway wheels won stop even in the rain a second bridge has been completed next to the Iron Bridge in Old Del
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अब बारिश के मौसम में भी पुरानी दिल्ली से आने-जाने वाली ट्रेनों के पहिये नहीं थमेंगे। पहले बारिश के मौसम में यमुना के खतरे के निशान पर आते ही लोहे वाले पुल तक पानी टकराने लगता है। इस कारण पुरानी दिल्ली आने वाली ट्रेनों के पहिये थम जाते थे। अब लोहे के पुल के नजदीक ही बड़ा ब्रिज बनकर तैयार है जो पुराने पुल से करीब तीन मीटर ऊंचा है। पिछले कुछ दिनों से पुल पर ट्रेनों का ट्रायल किया जा रहा है। ट्रायल सफल रहने पर इसे पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री कर सकते हैं।

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नया पुल बनाने की योजना को 1997-98 में अप्रूवल मिला और 2003 में निर्माण कार्य शुरू किया गया। हालांकि, इसमें लगातार विलंब होता रहा। अधिकारियों का कहना है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) व अन्य एजेंसियों से अप्रूवल लेना पड़ा था। इस कारण करीब पांच साल विलंब हुआ। अब नया पुल तैयार हो गया है। पुराने लोहे वाले पुल के समानांतर नए रेलवे पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी पुल की ओर से निरीक्षण कार्य भी पूरा हो चुका है। 
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अब शाहदरा और गाजियाबाद से आने वाली ट्रेनों का ट्रायल रन किया जा रहा है। जल्द ही इसका औपचारिक उद्घाटन होने वाला है। उसके बाद अधिकतर ट्रेनों को इस पुल पर डायवर्ट कर दिया जाएगा। नए पुल के शुरू होने से दिल्ली के रेलवे नेटवर्क को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर पुरानी दिल्ली स्टेशन से निकलने वाली ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा।
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1866 में अंग्रेजों ने बनवाया था पुल
ऐतिहासिक महत्व रखने वाले पुराने रेलवे पुल को 1866 में अंग्रेजों ने बनवाया था। इसका निर्माण महज तीन वर्षों में पूरा किया गया था। इसके ऊपर ट्रेनें और नीचे गाड़ियां चलती हैं। यह दिल्ली को हावड़ा से जोड़ने वाला पहला बड़ा रेलवे पुल था। लोहे का पुल अपनी तकनीकी उम्र पूरी कर चुका है। धीरे-धीरे इस पुल से सभी ट्रेनों को नए पुल पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। 


पुराने लोहे के रेलवे पुल पर 10 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रेन को पास किया जाता है। बाढ़ के दौरान यमुना नदी का जलस्तर अधिक होने पर पुल पर ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी जाती है। ट्रेनों को दूसरे पुल पर डायवर्ट कर दिया जाता है। ऐसे में गाजियाबाद से दिल्ली को आने और जाने वाली ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होता है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी ट्रेनों का दबाव बढ़ता है। अब नए पुल पर ट्रेनें 20 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकेंगी। पुल की ऊंचाई भी लगभग तीन मीटर अधिक होने से ट्रेनों का संचालन जारी रहेगा।

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