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Delhi News: निजी कंपनी चलाएगी कश्मीरी गेट-फरीदाबाद मेट्रो
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अब वायलेट लाइन पर निजी कंपनी का होगा चालक
ऑपरेशन दिल्ली मेट्रो के पास रहेगी
तकनीकी वजहों से रेड लाइन को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया रूकी
30 : जनवरी को टेंडर की निविदा खुलेगी
01 : माह में प्रक्रिया पूरी होने की संभावना
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने दिल्ली के कश्मीरी गेट से फरीदाबाद के वाईएमसीए चौक तक जाने वाली वायलेट लाइन मेट्रो की कमान निजी हाथों में देने की तैयारी में है। इस लाइन पर दौड़ने वाली मेट्रो का चालक निजी कंपनी का होगा, जबकि ऑपरेशन दिल्ली मेट्रो संभालेगी। इसके लिए बृहस्पतिवार दिल्ली मेट्रो ने टेंडर भी जारी कर दिया है। एक महीने के भीतर इसकी प्रक्रिया कर ली जाएगी। वहीं, तकनीकी वजहों से शहीद स्थल-रिठाला के बीच चलने वाली रेड लाइन मेट्रो के लिए इस प्रक्रिया को रोक दिया गया है। उधर, समयपुर बादली-गुरुग्राम के बीच की येलो लाइन मेट्रो का संचालन निजी हाथों के लिए नए सिरे से टेंडर जारी किया है।
डीएमआरसी अधिकारियों का कहना है कि वायलेट मेट्रो को चलाने का जिम्मा निजी कंपनी के हाथ में होगा। इसमें कंपनी दिल्ली मेट्रो को 266 ट्रेन चालक, नौ ट्रेन सुपरवाइजर, एक ट्रेन चालक प्रबंधक उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा मेट्रो के संचालन से जुड़ीं सारी प्रक्रियाएं मेट्रो के पास होंगी। 30 जनवरी को टेंडर की टेक्निकल निविदा खुलेगी। इसके बाद कंपनी को मेट्रो से जुड़ने की दूसरी औपचारिकताएं पूरी करनी होगी और उसके ड्राइवर मेट्रो का संचालन करेंगे।
उधर, दिल्ली मेट्रो ने रेड लाइन के लिए इसी तरह प्रक्रिया अक्तूबर में शुरू की थी। लेकिन इस बीच कुछ तकनीकी वजहों से इसे रोक दिया गया है। जरूरी सुधार के बाद इसे दोबारा शुरू किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मेट्रो अपनी निगरानी प्रणाली का मजबूत करेगा। साथ ही जरूरत के हिसाब से मेट्रो कर्मचारियों की तैनाती भी होगी।
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2021 में येला लाइन को सौंपा गया था निजी हाथों मेंइससे पहले येलो लाइन पर मेट्रो का संचालन वर्ष 2021 में निजी हाथों में सौंपा गया था। इसका अनुबंध अगले साल खत्म हो रहा है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर चलाई गई यह योजना सफल रही है। अब दोबार से इसके लिए प्रक्रिया शुरू होगी। प्रदर्शन के आधार पर कंपनी पर संचालन का जिम्मा आगे भी बढ़ाया जाएगा। दोनों लाइनों के लिए इस योजना की लागत 96.29 करोड़ होगी।
आवंटन के बाद शुरू होगी नियुक्ति प्रक्रिया
टेंडर आवंटन के बाद ढाई माह में कंपनी को ट्रेन चालकों की नियुक्ति करनी होगी। इसके बाद ढाई माह डीएमआरसी चालकों को प्रशिक्षित करेगा। प्रशिक्षण के बाद कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए कर्मचारियों को परीक्षा पास करनी होगी। इस परीक्षा के लिए अधिकतम दो बार अवसर दिया जाएगा। दो बार में परीक्षा पास नहीं होने पर उसे नहीं रखा जाएगा। ट्रेन चालकों से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जाएगा।
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ऑपरेशन दिल्ली मेट्रो के पास रहेगी
तकनीकी वजहों से रेड लाइन को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया रूकी
30 : जनवरी को टेंडर की निविदा खुलेगी
01 : माह में प्रक्रिया पूरी होने की संभावना
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने दिल्ली के कश्मीरी गेट से फरीदाबाद के वाईएमसीए चौक तक जाने वाली वायलेट लाइन मेट्रो की कमान निजी हाथों में देने की तैयारी में है। इस लाइन पर दौड़ने वाली मेट्रो का चालक निजी कंपनी का होगा, जबकि ऑपरेशन दिल्ली मेट्रो संभालेगी। इसके लिए बृहस्पतिवार दिल्ली मेट्रो ने टेंडर भी जारी कर दिया है। एक महीने के भीतर इसकी प्रक्रिया कर ली जाएगी। वहीं, तकनीकी वजहों से शहीद स्थल-रिठाला के बीच चलने वाली रेड लाइन मेट्रो के लिए इस प्रक्रिया को रोक दिया गया है। उधर, समयपुर बादली-गुरुग्राम के बीच की येलो लाइन मेट्रो का संचालन निजी हाथों के लिए नए सिरे से टेंडर जारी किया है।
डीएमआरसी अधिकारियों का कहना है कि वायलेट मेट्रो को चलाने का जिम्मा निजी कंपनी के हाथ में होगा। इसमें कंपनी दिल्ली मेट्रो को 266 ट्रेन चालक, नौ ट्रेन सुपरवाइजर, एक ट्रेन चालक प्रबंधक उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा मेट्रो के संचालन से जुड़ीं सारी प्रक्रियाएं मेट्रो के पास होंगी। 30 जनवरी को टेंडर की टेक्निकल निविदा खुलेगी। इसके बाद कंपनी को मेट्रो से जुड़ने की दूसरी औपचारिकताएं पूरी करनी होगी और उसके ड्राइवर मेट्रो का संचालन करेंगे।
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उधर, दिल्ली मेट्रो ने रेड लाइन के लिए इसी तरह प्रक्रिया अक्तूबर में शुरू की थी। लेकिन इस बीच कुछ तकनीकी वजहों से इसे रोक दिया गया है। जरूरी सुधार के बाद इसे दोबारा शुरू किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मेट्रो अपनी निगरानी प्रणाली का मजबूत करेगा। साथ ही जरूरत के हिसाब से मेट्रो कर्मचारियों की तैनाती भी होगी।
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2021 में येला लाइन को सौंपा गया था निजी हाथों मेंइससे पहले येलो लाइन पर मेट्रो का संचालन वर्ष 2021 में निजी हाथों में सौंपा गया था। इसका अनुबंध अगले साल खत्म हो रहा है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर चलाई गई यह योजना सफल रही है। अब दोबार से इसके लिए प्रक्रिया शुरू होगी। प्रदर्शन के आधार पर कंपनी पर संचालन का जिम्मा आगे भी बढ़ाया जाएगा। दोनों लाइनों के लिए इस योजना की लागत 96.29 करोड़ होगी।
आवंटन के बाद शुरू होगी नियुक्ति प्रक्रिया
टेंडर आवंटन के बाद ढाई माह में कंपनी को ट्रेन चालकों की नियुक्ति करनी होगी। इसके बाद ढाई माह डीएमआरसी चालकों को प्रशिक्षित करेगा। प्रशिक्षण के बाद कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए कर्मचारियों को परीक्षा पास करनी होगी। इस परीक्षा के लिए अधिकतम दो बार अवसर दिया जाएगा। दो बार में परीक्षा पास नहीं होने पर उसे नहीं रखा जाएगा। ट्रेन चालकों से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जाएगा।