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दिल्ली: प्रदूषण ने बढ़ाया गले में खराश-आंखों में जलन, बुजुर्ग-बच्चे और कोरोना से ठीक हुए मरीजों की बढ़ी परेशानी
Fri, 05 Nov 2021 10:49 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Fri, 05 Nov 2021 10:49 PM IST
सार
एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि हमने एक अध्ययन किया है, जिसमें हमने देखा कि जब भी प्रदूषण का स्तर ज्यादा होता है तो उसके कुछ दिन बाद बच्चों और व्यस्कों में सांस की समस्या की इमरजेंसी विजिट बढ़ जाती है।
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delhi pollution
- फोटो : ANI
विस्तार
दिल्ली की हवा लोगों के गले में खराश, आंखों में जलन, सांस में तकलीफ दो रही है। खासकर बुजुर्ग, छोटे बच्चे और हाल ही में कोरोना से ठीक हुए गंभीर मरीजों की दिक्कत बढ़ गई है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि हर साल दिवाली और सर्दियों के समय उत्तरी भारत में पराली जलाने, पटाखों, दूसरी वजहों से दिल्ली और पूरे इंडो गैंजेटिक बेल्ट में स्मॉग होता है और कई दिनों तक विजिबिलिटी बहुत खराब रहती है। इसका सांस के स्वास्थ्य पर बहुत असर होता है।
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उन्होंने कहा कि हमने एक अध्ययन किया है, जिसमें हमने देखा कि जब भी प्रदूषण का स्तर ज्यादा होता है तो उसके कुछ दिन बाद बच्चों और व्यस्कों में सांस की समस्या की इमरजेंसी विजिट बढ़ जाती है। ये तय है कि प्रदूषण से सांस की समस्या बढ़ जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, प्रदूषण के कारण दिल्ली के सभी अस्पतालों में मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि, राहत की बात है इस साल जलने वाले मरीजों की संख्या में काफी गिरावट दर्ज हुई है।
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