दिल्ली में प्रदूषण : नियंत्रण मानकों का उल्लंघन करने पर 92 निर्माण साइट सील, ओपीडी में बढ़े मरीज
गोपाल राय ने 114 टैंकरों को दिखाई हरी झंडी, सड़कों पर होगा पानी का छिड़काव। उधर, दिल्ली के अस्पतालों में प्रदूषण जनिच बीमारियों और समस्याओं के कारण ओपीडी में मरीज बढ़ गए हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का उल्लंघन करने पर दिल्ली सरकार ने 92 निर्माण साइट को सील करने के आदेश दिए हैं। इन साइट के पूर्व में औचक निरीक्षण के दौरान दिल्ली सरकार के धूल नियंत्रण दिशा-निर्देशों का उल्लंघन पाया गया था। दूसरी तरफ, दिल्ली सरकार का कहना है कि दिवाली के दिन पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं। कुछ लोगों ने पटाखे जलाए, जिसकी वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि सरकार के प्रदूषण नियंत्रण के मानक के उल्लंघन पर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को दिल्ली में धूल का कारण बनी 92 निर्माण साइट को सील करने के निर्देश दिए गए हैं। गोपाल राय ने कहा कि धूल को नियंत्रित करने के लिए शनिवार को सरकार ने आपातकालीन कदम उठाते हुए सड़कों पर पानी का छिड़काव शुरू किया है।
एक दिन पहले पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की करीब 3500 और शनिवार को करीब चार हजार घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण को काबू करने के लिए दिल्ली में कई जगहों पर बड़ी स्मॉग गन लगाई गई हैं। 114 टैंकर लगाकर पूरी दिल्ली में सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली सचिवालय के बाहर टैंकरों को हरी झंडी दिखाई।
‘सबसे ज्यादा पंजाब, इसके बाद हरियाणा-यूपी में जल रही पराली’
गोपाल राय ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब में सबसे अधिक पराली जलाई जा रही है। इसके बाद हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जल रही है। संभावना है कि वायु प्रदूषण में एक-दो दिन में कुछ सुधार होगा। पंजाब और हरियाणा में जिस तरह पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, यह बढ़ती हैं तो निश्चित रूप से इसका प्रभाव दिल्ली के ऊपर भी दिखेगा। दिल्ली में पटाखे जलाने पर गोपाल राय ने कहा कि भाजपा के लोग खुद कह रहे हैं कि वे पटाखे जलाने के पक्ष में हैं। इसके लिए किसी अन्य प्रमाण की जरूरत नहीं है।
प्रदूषण से ओपीडी में 25 फीसदी बढ़े मरीज
प्रदूषण के कारण दिल्ली-एनसीआर में बने गंभीर हालात के बीच अस्पतालों में मरीजों का पहुंचना जारी है। बीते दो दिन में सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या 25 फीसदी बढ़ी है। मरीज सांस संबंधी और अन्य समस्याएं लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।
प्रदूषण के कारण इन दिनों एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, लोकनायक, जीबी पंत, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी, जीटीबी समेत अन्य अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों के पहुंचने का सिलसिला बना हुआ है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ के साथ सीने में दर्द, जलन व अन्य समस्याएं हो रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बीते दो दिन में प्रदूषण की वजह से हालात गंभीर बने हुए हैं। यह वातावरण के साथ-साथ मनुष्य के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। यही वजह है कि ओपीडी में मरीज प्रदूषण से होने वाली परेशानियों को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें भी उन मरीजों की संख्या अधिक है, जो पहले से ही मधुमेह, अस्थमा व दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं।
बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा
प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बच्चे व बुजुर्ग कम से कम बाहर निकलें। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से इन पर प्रदूषण का प्रभाव अधिक हो सकता है। जो बुजुर्ग पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, वे जरूरी होने पर ही घर से निकलें। साथ ही, गर्भवती महिलाओं को भी बाहर न निकलने की सलाह है।
यह करें
- कुछ दिन तक सुबह-शाम की सैर के लिए बाहर जाने से बचें।
- कोशिश करें कि दिन में चार से पांच मिनट के अंतराल पर गुनगुना पानी पीते रहें।
- बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग जरूर करें।
- छोटे बच्चों को बाहर के वातावरण से बचाकर रखें।
- दो दिन तक बुखार रहने पर खून की जांच जरूरी। डेंगू, मलेरिया व टायफाइड का टेस्ट कराएं।
- आगामी दिनों में कोरोना के मामले बढ़ने की आशंका, भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें।