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दिल्ली दंगा: उमर खालिद की जमानत का पुलिस ने किया विरोध, कहा- लोकतंत्र को अस्थिर करने का था मकसद
Tue, 11 Jan 2022 08:15 PM IST
सुशील कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार
Updated Tue, 11 Jan 2022 08:15 PM IST
सार
दिसंबर 2019 में पहले चरण के दंगों में 101 पुलिस अधिकारी और 41 सामान्य व्यक्ति घायल हुए थे। दूसरे चरण में 132 पुलिस अधिकारी के अलावा 76 अन्य घायल हुए थे। एसपीपी ने कहा कि 61 दावों का निपटारा किया जा चुका है और अधिक का निपटारा किया जाना शेष है।
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विस्तार
जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को कहा कि दंगों की साजिश का मकसद लोकतंत्र की नींव को अस्थिर कर केंद्र सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर करना था। खालिद समेत दूसरे आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज है। 2020 में उत्तर पूर्व दिल्ली में हुए दंगे में 53 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 700 से अधिक जख्मी हो गए थे। आरोपियों की जमानत याचिका पर पिछले पांच महीने से अधिक समय से बहस चल रही है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष जमानत याचिका का विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) अमित प्रसाद ने जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के उन दावों का विरोध किया, जिसमें जांच एजेंसी को सांप्रदायिक और दंगों की साजिश के मामले में आरोप पत्र को एक कल्पना बताया गया था। दंगे का मकसद सरकार नागरिकता (संशोधन) अधिनियम सीएए के मामले में लोकतंत्र की नींव को अस्थिर करना था। इसके पीछे यह भी सोच थी कि केंद्र सरकार पर सीएए को वापस लेने के लिए कैसे दबाव बनाया जाए।
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23 विरोध स्थल बनाए गए थे ताकि हालात पर नजर बनाए रखते हुए तमाम जरूरी सुविधाएं भी आसानी से उपलब्ध हो सके। कुछ विरोध स्थलों पर एक जैसी तख्तियों और बैनरों के उपयोग किया गया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि एक समन्वित तरीके से दंगे की योजना बनाई गई थी। चार्जशीट के जरिये यह प्रदर्शित किया गया है कि दिसंबर 2019 के दंगों और फरवरी 2020 के दंगों के बीच आपसी ताल्लुक थे। चार्जशीट में खुलासा हुआ कि 53 लोग मारे गए।
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दिसंबर 2019 में पहले चरण के दंगों में 101 पुलिस अधिकारी और 41 सामान्य व्यक्ति घायल हुए थे। दूसरे चरण में 132 पुलिस अधिकारी के अलावा 76 अन्य घायल हुए थे। एसपीपी ने कहा कि 61 दावों का निपटारा किया जा चुका है और अधिक का निपटारा किया जाना शेष है।
मामले की जांच से पता चला है कि दंगे के दौरान आग्नेयास्त्रों, पेट्रोल बम, हमले में तेजाब, लाठी, लोहे के रॉड और गुलेल का इस्तेमाल किया गया। प्रसाद ने आगे कहा कि खालिद ने अपने वकील के माध्यम से अदालत का ध्यान भटकाने के लिए अपनी जमानत अर्जी पर बहस करते हुए अप्रासंगिक सामग्री पर ध्यान केंद्रित किया। वह (उमर) चाहते हैं कि उनके आवेदन पर एक वेब श्रृंखला के संदर्भ में निर्णय लिया जाए और वर्तमान मामले को 'द फैमिली मैन' या 'द ट्रायल ऑफ द शिकागो 7' से जोड़ा जाए।