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दिल्ली: भड़काऊ नारेबाजी मामले में पिंकी चौधरी को राहत नहीं, कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत अर्जी
Sat, 21 Aug 2021 07:56 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 21 Aug 2021 07:56 PM IST
सार
कथित भड़काऊ नारेबाजी के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने पिंकी चौधरी की अग्रिम जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
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पिंकी चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित भड़काऊ नारेबाजी के मामले में हिंदू रक्षा दल के नेता पिंकी चौधरी को पटियाला हाउस कोर्ट से राहत नहीं मिली। पिंकी चौधरी की अग्रिम जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने जंतर-मंतर पर लगाए गए मुस्लिम विरोधी नारों के सिलसिले में आरोपी हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
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अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और विडियो क्लिप में वह एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करता हुआ दिखाई दे रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने अपने फैसले में कहा कि जंतर मंतर पर यूट्यूब न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में भी आरोपी ने ऐसे आपत्तिजनक भाषण दिए जिससे दो समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने का प्रयास किया गया है। आरोपी का रवैया अलोकतांत्रिक है।
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अदालत ने अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील से पूछा था कि क्या वीडियो में कहे गए शब्द वास्तव में उनके मुवक्किल के हैं। अधिवक्ता जैन ने माना था कि शब्द उनके मुवक्किल के ही हैं।
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पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सभी तथ्यों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी विभिन्न धर्मों के बीच शत्रुता को बढ़ावा दे रहा है। आरोपियों द्वारा लोगों के दो गुटों को उकसाया जा रहा है। उन्होंने कहा यह गंभीर आरोप देश के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आरोपी के खिलाफ अन्य धाराओं के अलावा आईपीसी की धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कृत्य करना) के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा आरोपी से हिरासत में पूछताछ करनी है। ऐसे में अग्रिम जमानत आवेदन खारिज की जाए।
बचाव पक्ष ने तर्क रखा था कि उनके मुवक्किल का इरादा हिंसा का नहीं था। यदि पूरे मामले को ध्यान से देखा जाए तो स्पष्ट है कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम प्राथमिकी में नहीं है और न ही उसने कोई नारे लगाए।
अदालत ने सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा थाी कि आखिर पुलिस ने यूट्यूब न्यूज चैनल के रिपोर्टर से पूछताछ क्यों नहीं कि जबकि वह लोगों को उकसाने के लिए जानबूझकर आपत्तिजनक सवाल उठाते हुए देखा जा रहा है।
मामले के जांच अधिकारी ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए चैनल के एक रिपोर्टर को आरोपी द्वारा जंतर-मंतर पर दिए 11 मिनट के वीडियो की ट्रांसक्रिप्ट पेश की थी। अदालत ने 13 अगस्त को तीन अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने आरोपियों द्वारा आठ अगस्त को जंतर-मंतर पर की गई नारेबाजी पर कहा था कि इस देश के नागरिक से अलोकतांत्रिक रवैये की अपेक्षा नहीं की जा सकती।