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तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिरा, महिला की मौत

Sat, 31 Aug 2019 01:45 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 31 Aug 2019 01:45 AM IST
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Part of a three-storey building fell, the woman died
समयपुर बादली इलाके के जीवन पार्क में गिरी इमारत। - फोटो : Ashram
तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिरा, महिला की मौत
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नई दिल्ली। समयपुर बादली के जीवन पार्क इलाके में शुक्रवार सुबह उस समय अफरातफरी मच गई, जब तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। इस हिस्से में दो कमरे थे जो पूरी तरह से ध्वस्त हो गए। हादसे में एक महिला समेत तीन लोग मलबे में दब गए, जिन्हें मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया, जबकि उसके पति और एक किरायेदार का इलाज चल रहा है।
पुलिस के अनुसार, मृत महिला की पहचान पूनम (19) के रूप में हुई है, जबकि उसके पति का नाम छोटू (22) और किरायेदार की पहचान प्रवीण (27) के रूप में हुई है। शुक्रवार सुबह करीब सवा पांच बजे पुलिस व दमकल कर्मियों को समयपुर बादली के जीवन पार्क के शंकर चौक के पास एक इमारत का कुछ हिस्सा गिरने की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही पुलिस व दमकल कर्मी और सिविल डिफेंस के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने में जुट गए। मलबे से तीन लोगों को बाहर निकालकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने पूनम को मृत घोषित कर दिया।
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जांच के बाद पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिस इमारत में हादसा हुआ है वह पूरी तरह से जर्जर थी। करीब 160 गज में बनी इमारत को गार्डर और टी आयरन से बनाया गया था। इसमें 31 कमरे और चार दुकानें हैं। इमारत में करीब 30 से 35 लोग बतौर किराएदार रहते थे। इमारत के मालिक की पहचान नीटू अग्रवाल के रूप में हुई है। पुलिस ने इस बाबत लापरवाही से हुई मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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दो माह पहले ही हुई थी शादी
इस घटना में मृत मूलत: हरदोई (यूपी) निवासी पूनम की दो माह पहले छोटू से शादी हुई थी। छोटू दिल्ली में मजदूरी करता है। एक माह पहलेे ही छोटू अपनी पत्नी को लेकर इस मकान में रहने के लिए आया था। छोटू अपनी पत्नी के साथ इमारत की पहली मंजिल पर रहता था, जबकि पूनम के माता-पिता अपने बच्चों के साथ दूसरी मंजिल पर रहते हैं। घटना के समय पूनम के परिवार वाले कमरे में नहीं थे।

भयावह हो सकता था मंजर
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पूरी इमारत जमींदोज हो जाती तो यहां का मंजर और भी भयावह होता। घटना के समय इमारत में 30 से 35 लोग मौजूद थे। यहां रहने वाले सुरेश ने बताया कि हादसा होते ही सभी लोग घर से बाहर निकल गए। दोपहर तक उन्हें एक निवाला भी नसीब नहीं हुआ। छोटे- छोटे बच्चे भूख से रोने लगे। उसके बाद स्थानीय लोगों ने बच्चों को खाना खिलाया। यहां रहने वाले मजदूर तबके के लोगों के लिए अब आशियाने का संकट खड़ा हो गया है। लोगों ने बताया कि इमारत के कभी भी गिरने की आशंका को देखते हुए पुलिस अब किसी को भी इमारत में घुसने की इजाजत नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इमारत के मालिक के इलाके में कुछ और भी मकान हैं, जिनकी हालत भी काफी जर्जर हैं।
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