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क्लासरूम में संसद : छात्रों ने समझा कैसे चलती है कार्यवाही, फिर हुआ संवाद
Sat, 25 Sep 2021 05:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 25 Sep 2021 05:25 AM IST
सार
हंसराज कॉलेज की वाद-विवाद समिति की ओर से आयोजित की गई महात्मा हंसराज राष्ट्रीय युवा संसद। कार्यक्रम में अमर उजाला ने निभाई मीडिया पार्टनर की भूमिका।
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अतिथि और विद्यार्थी...
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत के भविष्य के लिए आवश्यक है कि भावी राजनीति में युवाओं की भूमिका विश्वविद्यालय स्तर पर ही विकसित की जाए जिससे उनमें राष्ट्र, समाज, पर्यावरण, विश्व बंधुत्व के विषय में तर्क शक्ति का विकास हो सके एवं सुदृढ़ राजनीतिक परंपरा का निर्माण हो सके। शिक्षण प्रक्रिया केतहत ही विद्यार्थियों को राजनीतिक कार्य प्रणाली जानने का अवसर प्राप्त होना चाहिए। जिससे उनमें निर्णयात्मक क्षमता एवं नीति निर्माण संबंधी ज्ञान का विकास किया जा सके। शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने यह बातें हंसराज कॉलेज में छात्रों से संवाद करते हुए कही।
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हंसराज कॉलेज की वाद-विवाद समिति प्रस्ताव की ओर से शुक्रवार को दो दिवसीय (24-25 सितंबर) महात्मा हंसराज राष्ट्रीय युवा संसद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अमर उजाला मीडिया पार्टनर की भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन उपाध्यक्ष प्रदीप राय, बीजेपी प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने किया।
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इस अवसर पर कॉलेज प्रिंसिपल डॉ रमा भी उपस्थित थीं। इस मौके पर राकेश सिन्हा ने कहा कि जो समाज तर्कों को गढ़ता है वहीं समाज जीवित रहता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सदन की मजबूती की जड़ें हमारे भीतर है। इस युवा संसद में देश भर के विभिन्न 60 शिक्षण संस्थानों से 130 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
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दोपहर बाद युवा संसद की लोकसभा में भारत में धर्मनिरपेक्षता और धर्मांतरण विरोधी कानूनों, राज्यसभा में भारतीय नौकरशाही प्रणाली में संभावित सुधारों और अखिल भारतीय राजनीतिक दल सम्मेलन में एक राष्ट्र एक चुनाव पर बल देने केसाथ भारत में चुनावी प्रक्रिया में सुधारों पर चर्चा शुरु हुई। शुरुआत में छात्रों को सदन की कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया।
इस दौरान छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से परिचित होने का अवसर मिला। युवा संसद में छात्रों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत अन्य मंत्री व सांसद बनाकर लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत की गई। युवा संसद के तहत शून्य काल व प्रश्न काल कल होंगे जिसमें नेताओं केरुप में छात्र अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए सवालों केजवाब देंगे।
देशभर के विश्वविद्यालयों में ऐसे आयोजन अवश्य होने चाहिए
शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने युवा संसद में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देशभर के विश्वविद्यालयों में इस प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन अवश्य होना चाहिए ताकि छात्रों में राष्ट्रहित संबंधी अभिव्यक्तियों को प्रकट करने की शैली एवं भाषा को विकसित किया जा सके। उन्होंने इस दौरान लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही से संबंधित कुछ नियमों की भी चर्चा की जिससे कि युवा संसद की कार्यवाही को प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही की कार्यसूची पहले से ही निर्मित होनी चाहिए। लोक महत्व के मामलों पर आधिकारिक बहस और प्रस्तावित विधेयक और विधाई कार्य, गैर सरकारी सदस्य का प्रस्ताव ध्यानाकर्षण संबंधित नोटिस, काम रोको प्रस्ताव, विशेषाधिकार उल्लंघन संबंधित प्रस्ताव, से जुड़े बिंदुओं का युवाओं को पता होना चाहिए। उन्हें संसद की कार्यवाही और प्रश्नकाल के अधिकार की शर्तों के बारे में पता होना चाहिए।
जाति वर्ग समुदाय के नाम पर भेदभाव होता है, इनमें सुधार करना पड़ेगा
शिक्षा मंत्री ने संवाद करते हुए छात्रों से सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी सोचा था कि वह सांसद बनेंगे, बनेंगे तो क्या बदलाव लाएंगे। इस पर छात्रों ने अपनी वाकपटुता से उनका जवाब दिया कि गरीबी देखकर बुरा लगता था और ऐसा करते कि कोई भिखारी ही ना हो। शिक्षा नीति को बदल देते ताकि छात्र रट्टा ना मारे। आज के संसद में क्या बदलाव होना चाहिए। छात्रों ने जवाब दिया कि आज भी देखने में आता है कि जाति वर्ग, समुदाय केनाम पर भेदभाव होता है, अब इसमें सुधार करने की जरुरत है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को भी लागू करना जरुरी हो गया है। कुछ छात्रों ने अर्थव्यवस्था केमुद्दे को भी उठाए। यदि सांसद बनते तो शिक्षा और स्वास्थय को मौलिक अधिकार बना देते। छात्रों ने यह मुद्दा भी उठाया कि दुष्कर्म संबंधित कानून को मजबूत बनाना चाहिए।