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Hindi News ›   Delhi ›   NSUT to treat its own sewer water Conservation of ground water will be encouraged

Water purification : एनएसयूटी अपने सीवर का पानी खुद शोधित करेगा, भूजल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

Sun, 29 May 2022 06:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 29 May 2022 06:40 AM IST
सार

विश्वविद्यालय में लगाए जाने वाला शोधित जल संयंत्र अत्याधुनिक होगा। यहां से प्राप्त होने वाले उच्च गुणवत्ता शोधित पानी का हरित क्षेत्र के साथ-साथ विश्वविद्यालय के शौचालयों से लेकर चिलर प्लांट में इस्तेमाल किया जाएगा।
 

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NSUT to treat its own sewer water Conservation of ground water will be encouraged
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी संस्थान (एनएसयूटी) जीरो डिस्चार्ज कैंपस परियोजना के तहत अपने सीवर के पानी को स्वयं शोधित करेगा। विश्वविद्यालय में साढ़े पांच किलोलीटर प्रति दिन क्षमता के हिसाब से जल शोधित संयंत्र लगाया जाएगा। इस परियोजना के लिए विश्वविद्यालय को हरी झंडी मिल गई है।
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विश्वविद्यालय में लगाए जाने वाला शोधित जल संयंत्र अत्याधुनिक होगा। यहां से प्राप्त होने वाले उच्च गुणवत्ता शोधित पानी का हरित क्षेत्र के साथ-साथ विश्वविद्यालय के शौचालयों से लेकर चिलर प्लांट में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे भूजल का दोहन भी नहीं होगा और  इसके संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
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विश्वविद्यालय में शोधित जल संयंत्र लगाने का काम शुरू भी कर दिया गया है। इसके लिए एक निजी कंपनी को करीब छह करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई है। खास बात यह है कि इसके संचालन के लिए विश्वविद्यालय को अलग से खर्च उठाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि संयंत्र लगाने के साथ-साथ कंपनी 12 वर्ष तक संयंत्र के संचालन व प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाएगी। 
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विश्वविद्यालय में उत्पन्न होता है पांच लाख लीटर सीवर का पानी 
विश्वविद्यालय में करीब 50 एकड़ भूमि पर हरित क्षेत्र विकसित है। यहां अभी नियमित रूप से करीब पांच लाख लीटर सीवर का पानी उत्पन्न होता है। शोधन के बाद इस पानी का प्रयोग हरित क्षेत्र में पानी देने के लिए किया जाता है। हालांकि, गर्मी में हरित क्षेत्र में पानी का प्रयोग अधिक होता है।

ऐसे में अभी करीब सात लाख लीटर पानी का प्रयोग हो रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय दिल्ली जल बोर्ड को भी भुगतान करता है। शोधित जल संयंत्र से उत्पन्न होने वाले करीब दो लाख लीटर शोधित जल का इस्तेमाल हो सकता है। अच्छी बात यह है कि सर्दी में  चिलर प्लांट बंद रहते हैं व हरित क्षेत्र में भी पानी की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में शोधित पानी की आपूर्ति भी कम होगी। वहीं, शोधन जल संयंत्र के बाद विश्वविद्यालय को अगल से जल बोर्ड को भुगतान नहीं करना होगा। 


पूर्वी व पश्चिमी कैंपस में भी जीरो डिस्चार्ज तकनीक पर प्रयास जारी
मुख्य कैंपस के साथ  पूर्वी और व पश्चिमी कैंपस में जीरो डिस्चार्ज तकनीक का इस्तेमाल करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत यहां के हरित क्षेत्र की भी भूजल पर निर्भरता को खत्म किया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय परियोजना पर काम कर रहा है। 
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