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डीयू: एनएसयूआई ने सिर्फ ट्यूशन और परीक्षा शुल्क लेने की मांग की, आर्थिक बोझ के चलते पढ़ाई छोडने को मजबूर हो रहे विद्यार्थी
Mon, 12 Jul 2021 10:03 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Mon, 12 Jul 2021 10:03 PM IST
सार
एनएसयूआई का कहना है कि जब कक्षाएं ऑनलाइन चल रही हैं तो विश्वविदलय छात्रों से सिर्फ ट्यूशन फीस ही लें। अन्य शुल्क लेकर विद्यार्थियों की पढ़ाई में अड़चन ना डाली जाय।
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दिल्ली विश्वविद्यालय, फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना महामारी के कारण दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां ऑनलाइन ही चल रही हैं। विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षाएं ही ले रहे हैं, लेकिन पुस्तकालय शुल्क, लैब शुल्क, स्पोर्ट्स शुल्क समेत अन्य शुल्क वसूले जा रहे हैं।
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नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) का कहना है कि विवि प्रशासन को जितनी कक्षाएं चल रही हैं, उस हिसाब से विद्यार्थियों से वसूलनी चाहिए। एनएसयूआई की मांग है कि फीस कम की जाए और विद्यार्थियों से केवल ट्यूशन फीस व परीक्षा शुल्क ही लिया जाय।
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एनएसयूआई का कहना है कि जब कक्षाएं ऑनलाइन चल रही हैं तो विश्वविदलय छात्रों से सिर्फ ट्यूशन फीस ही लें। अन्य शुल्क लेकर विद्यार्थियों की पढ़ाई में अड़चन ना डाली जाय। एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव एवं दिल्ली प्रदेश प्रभारी नितिश गौड ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि केवल ट्यूशन फीस ली जाय। ऐसा न होने पर एनएसयूआई आंदोलन करने को मजबूर होगी।
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एनएसयूआई दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष कुनाल सहरावत ने प्रेस वार्ता में कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं। विद्यार्थी आर्थिक बोझ के कारण पढ़ाई छोडने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीयू के रामजस कॉलेज की फीस 13, 495 रुपये, दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म में 39, 520 रुपये फीस ली जा रही है।
डीयू का एक सेमेस्टर छह माह का होता है। लेकिन 2020-21 में शैक्षणिक सत्र 18-11-2020 को शुरू हुआ था। जबकि परीक्षाएं 15 मार्च से शुरू हुई थी। इस तरह से एक सेमेस्टर तीन महीने का हुआ, लेकिन उनसे फीस पूरे छह महीने के सेमेस्टर की फीस ली गई। ऐसे में जब सेमेस्टर तीन महीने का था तो फीस भी उतनी ही ली जानी चाहिए।