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Asola Bhati Sanctuary : अब प्रकृति की गोद में होगी साइकिल की सवारी, नीली झील तक जा सकेंगे पर्यटक 

Mon, 30 May 2022 04:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 30 May 2022 04:58 AM IST
सार

परियोजना के तहत अभयारण्य में 14 किलोमीटर का साइकिल ट्रैक बनाया जाएगा। साथ ही शुरुआती चरण में 10 साइकिलों को पार्क में शामिल किया जाएगा। आने वाले समय में यहां ई-वाहनों और गोल्फ कारों को भी अनुमति मिलेगी। 

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Now there will be a bicycle ride in the lap of nature, tourists will be able to go till the Nini lake
नीनी झील... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी के असोला भाटी अभयारण्य में स्थित नीली झील तक पर्यटक साइकिल से सवारी कर सकेंगे। इसके लिए दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने परियोजना तैयार कर ली है। परियोजना के तहत अभयारण्य में 14 किलोमीटर का साइकिल ट्रैक बनाया जाएगा। साथ ही शुरुआती चरण में 10 साइकिलों को पार्क में शामिल किया जाएगा। आने वाले समय में यहां ई-वाहनों और गोल्फ कारों को भी अनुमति मिलेगी। 

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वन एवं वन्यजीव विभाग के मुख्य वन संरक्षक निशिथ सक्सेना ने बताया कि नीली झील पार्क का पुनर्विकास का काम चल रहा है। इस कड़ी में तुगलकाबाद गेट से लेकर नीली झील तक 14 किलोमीटर का एक ट्रैक किया जा रहा रहा है। इस ट्रैक को कच्चा ही बनाया जाएगा, जिससे यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक माहौल को महसूस कर सके। अधिकारी ने बताया कि नीली झील पार्क करीब 40 हेक्टेयर क्षेत्रफल में है।
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इस पूरे क्षेत्रफल को विकसित किया जाना है। ऐसे में लोग तुगलकाबाद गेट से लेकर नीली झील प्राकृतिक माहौल का आनंद लेते हुए साइकिल से सवारी कर सकेंगे। इसके लिए गेट पर एक रिसेप्शन केंद्र भी बना लिया गया है। गेट से ही पर्यटकों को साइकिल का परमिट लेना होगा। हालांकि, इसके लिए लोगों को शुल्क का भुगतान करना होगा। अधिकारी का कहना है कि अभी साइकिल के किराये के लिए शुल्क का निर्धारण नहीं किया गया है, लेकिन लोगों की जेब पर अधिक असर न पड़े, इसलिए बहुत कम ही शुल्क लिया जाएगा। 
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ईको पार्क की तर्ज पर तैयार हो रहा है पार्क
अधिकारी ने बताया कि पार्क को ईको पार्क की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। पार्क में सभी चीजों को पर्यावरण हितैषी चीजों से तैयार किया जाएगा, जिससे प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचे। झील किनारे चारों तरफ बांस से बाउंड्री तैयार की जाएगी, जिससे कोई पर्यटक झील को गंदा नहीं कर सके। वहीं, झील में किसी भी प्रकार की गतिविधि करने की इजाजत नहीं होगी। लोगों की सुविधा के लिए पार्क में ईको शौचालय तैयार किए जाएंगे। पार्क को सुंदर रूप देने के लिए यहां जगह-जगह फव्वारें भी देखने को मिलेंगे। 

पर्यटकों की संख्य को किया जा सकता है सीमित
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि असोल भाटी अभ्यारण्य में वन्यजीवों की कई प्रजातियां निर्भर हैं। ऐसे में पर्यटकों के आगमन से वन्यजीवों के जीवन पर प्रभाव न पड़े, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। इसको देखते हुए यहां पर्यटकों की संख्या भी सीमित की जा सकती है। हालांकि, अभी यह तय नहीं किया गया है कि कितने पर्यटकों को एक बार में अनुमति मिलेगी। 

3डी मॉडल से दी जाएगी वन्यजीवों के बारे में जानकारी 
अभ्यारण्य को और भी आकर्षक बनाने के लिए यहां वन्यजीवों के 3डी मॉडल तैयार किए जाएंगे। इन मॉडलों को तैयार करने के साथ वन्यजीवों के बारे में भी जानकारी को प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे यहां आने वाले पर्यटक वन्यजीवों को लेकर जागरूक हो सके। इन आकृतियों को विशेष रूप से बच्चों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा।  


टावरों से होगी निगरानी 
नीली झील के साथ-साथ अभ्यारण्य की निगरानी के लिए यहां टॉवर बनाने का भी प्रस्ताव है। हालांकि, अभी इनकी संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि इन टॉवरों के माध्यम से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा सकेगी। संभावना है कि इसके लिए यहां वन रक्षकों को भी तैनात किया जा सकता है।

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