अगले साल 8500 मेगावाट होगी बिजली की जरूरत, केजरीवाल ने कहा- सरकार तैयार
- मुख्यमंत्री ने बिजली की बढ़ी मांग और मौजूदा स्थिति पर की समीक्षा बैठक
- ट्रांसफार्मरों को ठीक करने और लटकते तारों को भूमिगत करने पर फोकस
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बढ़ती आबादी के बीच दिल्ली में हर साल बिजली की मांग औसतन करीब पांच फीसदी बढ़ रही है। इससे अगले साल गर्मी के मौसम में पीक डिमांड 8,500 मेगावाट पहुंचने का अनुमान है। दिल्ली वालों को अबाध बिजली मुहैया कराने के लिए सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली विभाग को निर्देश दिया है कि 24 घंटे आपूर्ति के लिए ट्रांसफार्मर लगाने की जगह की पहचान की जाए। इससे जरूरत पड़ने पर इसका इंतजाम किया जा सकेगा। वहीं, लोगों की सुरक्षा के लिए कालोनियों के हाईटेंशन तारों को भूमिगत किया जाए।
इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को बिजली विभाग और बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान सीएम ने राजधानी में बिजली की बढ़ी मांग और विद्युत आपूर्ति की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में दिल्ली के विद्युत मंत्री सत्येंद्र जैन समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान बताया गया कि इस साल की पीक डिमांड बीते शुक्रवार को 7,323 थी। अगले साल इसमें बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है।
केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में हर साल नए ग्राहकों के बढ़ने की वजह से बिजली की खपत बढ़ रही है। हर साल औसतन 4-5 फीसद बिजली की मांग बढ़ जाती है। अभी तक बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में सफलता मिली है। दिल्ली के सभी निवासियों को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति दी जा रही है, लेकिन आगे की जरूरत के लिए उचित इंतजाम करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जगह की कमी के कारण डिस्कॉम को कई क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर ठीक कराने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या से निपटने की रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत बिजली कंपनियां सरकार को ऐसी जगहों की जानकारी देंगी, जहां ट्रांसफार्मर लगाया जा सकता है। सरकार उन क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर को ठीक कराने में डिस्कॉम की मदद करेगी। उन्होंने बताया कि अगले साल पीक डिमांड के दौरान 8,500 मेगावाट से ज्यादा होने का अनुमान है। सरकार इस स्तर की मांग पूरा करने के लिए तैयार है।