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दिल्ली: मासूमों को सलामत रखने के लिए एम्स में नया ब्लॉक शुरू, गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को मिलेगी सभी सुविधाएं
Mon, 19 Jul 2021 11:23 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 19 Jul 2021 11:23 PM IST
सार
एम्स के डॉक्टर का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का बहुत दिनों से इंतजार किया जा रहा था, अब जाकर यह पूरा हुआ है। इससे महिलाओं को बेहतर इलाज पाने में सुविधा होगी। एम्स के मस्जिद मोड परिसर में एक साथ कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। सबसे पहले यहां पर अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई गई।
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों को अधिक खतरा होने की आशंका जताई जा रही है। इसको देखते हुए सभी अस्पतालों में बच्चों के लिए आईसीयू और बेड की संख्या को बढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में दिल्ली एम्स में भी सोमवार से नया मातृ और शिशु ब्लॉक शुरू हो गया है।
इसके शुरू होने से एम्स में अब गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों का और बेहतर इलाज हो सकेगा। 425 बेड के इस ब्लॉक में उन्हें एक छत के नीचे तमाम जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी।
एम्स के डॉक्टर का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का बहुत दिनों से इंतजार किया जा रहा था, अब जाकर यह पूरा हुआ है। इससे महिलाओं को बेहतर इलाज पाने में सुविधा होगी। एम्स के मस्जिद मोड परिसर में एक साथ कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। सबसे पहले यहां पर अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई गई।
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इसके बाद यहां पर ओपीडी बिल्डिंग बनाई गई, जो जनता की सेवा के लिए शुरू हो चुकी है। आजकल इसी इमारत की आठवीं मंजिल पर कोविड के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके अलावा इस परिसर में 425 बेड का मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक बनाया गया है। 200 बेड का एकसर्जिकल ब्लॉक भी लगभग बनकर तैयार है।
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इसके शुरू होने से एम्स में अब गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों का और बेहतर इलाज हो सकेगा। 425 बेड के इस ब्लॉक में उन्हें एक छत के नीचे तमाम जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी।
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एम्स के डॉक्टर का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का बहुत दिनों से इंतजार किया जा रहा था, अब जाकर यह पूरा हुआ है। इससे महिलाओं को बेहतर इलाज पाने में सुविधा होगी। एम्स के मस्जिद मोड परिसर में एक साथ कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। सबसे पहले यहां पर अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई गई।
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इसके बाद यहां पर ओपीडी बिल्डिंग बनाई गई, जो जनता की सेवा के लिए शुरू हो चुकी है। आजकल इसी इमारत की आठवीं मंजिल पर कोविड के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके अलावा इस परिसर में 425 बेड का मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक बनाया गया है। 200 बेड का एकसर्जिकल ब्लॉक भी लगभग बनकर तैयार है।
बेड की समस्या हुई दूर
अभी तक एम्स की मुख्य इमारत में ही गर्भवती महिलाओं व नवजात बच्चों का इलाज चल रहा है। एम्स में इलाज के लिए खासकर वे महिलाएं पहुंचती हैं जिन्हें गर्भ के दौरान या बच्चे के जन्म के समय काफी दिक्कतें होती हैं, हालांकि बेड की कमी की वजह से अधिकांश महिलाओं को जगह नहीं मिल पाती थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए इस केंद्र की जरूरत महसूस हुई थी। हालांकि, इस ब्लॉक की शुरुआत 2014 में ही हुई थी 6 साल बाद अब यह शुरू हो पाया है।