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अनूठी गायन शैली और बुलंद आवाज के मालिक थे नरेंद्र चंचल : मालिनी अवस्थी

Fri, 22 Jan 2021 10:56 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jan 2021 10:56 PM IST
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Narender Chanchal was master of strong voice and special style
नई दिल्ली। लोकप्रिय भजन गायक नरेंद्र चंचल का शुक्रवार दोपहर अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। बड़े-बड़े कलाकारों ने साल 1980-90 के दशक में उनकी गायकी की धमक को याद किया। लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि वे अनूठी गायन शैली और बुलंद आवाज के मालिक थे। जब वह गाते थे तो अलग समां बन जाता था।
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वह 76 वर्ष के थे और पिछले लगभग तीन महीने से बीमार थे। डॉक्टरों के मुताबिक उनके ब्रेन में क्लोटिंग थी। जिसके इलाज के लिये 27 नवंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार दोपहर 12.15 बजे उन्होंने अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली।
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मालिनी अवस्थी ने कहा कि उत्तर भारत में माता के जागरण को उन्होंने ही प्रसिद्धि दिलाई थी। उनकेे ही गीत को याद करते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा कि मां सरस्वती के सच्चे पुजारी को माता रानी ने अपने परम धाम में बुला लिया है।
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उन्होंने कहा कि साल 1973 में जब बॉबी फिल्म आई थी तब वह नरेंद्र चंचल के गाए गीत ‘बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो’ को बार-बार सुनती थीं। उनकी आवाज और उनके अंदाज में खालिस गायकी होती थी। उन्होंने कहा कि नरेंद्र चंचल ने ताउम्र संगीत सेवा की है और समाज में अपनी अलग छवि बनाई है। जिसके लिये उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
अपनी गायकी के दम पर 1980-90 तक लोगों के दिलों पर किया राज
नरेंद्र चंचल ज्यादातर जागरण में भजन गाया करते थे। लेकिन उन्हें उनके गाए ‘चलो बुलावा आया है’ जैसे गीतों के लिये भी हमेशा याद किया जाता रहा है। वह अपनी गायकी के दम पर 1980-90 के दौरान लोगों के दिलों पर राज करते थे। कहते हैं कि उनकी आवाज लोगों के दिलों को आत्मसात करती थी। वह जिस जागरण में गाते थे वहां पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था।
बचपन में मां कैलाशवती से मिली भजन गायन की प्रेरणा
साल 1940 में अमृतसर के नमक मंडी में एक पंजाबी परिवार में जन्मे नरेंद्र चंचल को उनकी मां कैलाशवती से भजन गाने की प्रेरणा मिली। मां उनकी प्रथम गुरू भी थीं। उन्होंने अपनी गायकी के दम पर बॉलीवुड में एक अलग पहचान बनाई थी।

उन्हें साल 1973 में राज कपूर की फिल्म बॉबी के लिये गाए गाने ‘बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो’ गाने के बाद हिंदी सिनेमा में प्रसिद्धि मिली। इस गाने के लिये नरेंद्र चंचल ने साल 1974 में फिल्म फेयर सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक का पुरस्कार भी जीता। फिल्म अवतार में गाये उनके गाने ‘चलो बुलावा आया है’ ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया।
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