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Hindi News ›   Delhi ›   Narcotics Cell of Crime Branch of Delhi Police arrested North India most wanted drug smuggler

रॉबिनहुड तस्कर: भोला को 'भगवान' मानते थे 15-20 गांवों के लोग, इस वजह से नौ साल बाद चढ़ा पुलिस के हत्थे

Mon, 20 Sep 2021 10:07 AM IST
शाहरुख खान शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 20 Sep 2021 10:07 AM IST
सार

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की नारकोटिक्स सेल ने उत्तर भारत के मोस्ट वांटेड नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के फरीदपुर में गांव बेहड़ा निवासी तैमूर उर्फ भोला पर दिल्ली में एक लाख और यूपी में 50 हजार का ईनाम रखा गया था। 

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Narcotics Cell of Crime Branch of Delhi Police arrested North India most wanted drug smuggler
पुलिस ने ड्रग तस्कर को गिरफ्तार किया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'देखो-देखो, भोला भाग गया' जी हां उत्तर भारत का बड़ा ड्रग तस्कर तैमूर उर्फ भोला ने आसपास के 15 से 20 गांव में अपनी ऐसी इमेज बनाई हुई थी कि लोग उसे भगवान मानने लगे थे। भोला हर सुख-दुख में लाखों-लाखों रुपये देकर ग्रामीणों की मदद करता रहता था। यही वजह है कि दिल्ली, हरियाणा नंबर व पुलिस की गाड़ियां देखते गांव के बच्चे खेल-खेल में शोर मचाने लगते थे कि देखो-देखो भोला भाग गया। 
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ग्रामीणों का साथ मिलने का ही नतीजा था कि भोला पिछले करीब 9 साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था। उसकी गिरफ्तारी से दिल्ली यूपी के नौ मामले सुलझे हैं। इसके खिलाफ नशे का धंधा करने के अलावा यूपी में गुंडा एक्ट के तहत भी मामला दर्ज है। दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब भोला के खिलाफ मकोका का मामला दर्ज किया जा सकता है। फिलहाल इस पर विचार किया जा रहा है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
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दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बेहड़ा, फरीदपुर, बरेली के किसान परिवार में पैदा हुआ तैमूर पढ़ने लिखने में अच्छा छात्र रहा। उसने बरेली विश्वविद्यालय से बीए किया। इसके बाद उसने बरेली के ही फ्यूचर कॉलेज में एमबीए में दाखिला ले लिया। वह पढ़ाई पूरी कर विदेश जाने का सपना देखने लगा। लेकिन उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में उसे पढ़ाई ही बीच में छोड़नी पड़ी। 
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इस दौरान उसकी मुलाकात 2007 में गांव के ही एक बड़े हेरोइन तस्कर से हुई। उसके कहने पर तैमूर ने हेरोइन बरेली से दिल्ली ले जाने लगा। हर ट्रिप पर उसे 1600 रुपये मिलते थे। लेकिन वष 2008 में वेलकम से दिल्ली पुलिस ने उसे दबोच लिया। सात माह जेल में रहने के बाद उसने दोबारा इसी धंधे को शुरू कर दिया। वह पुलिस की वजह से कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था। इसके बाद उसने अपने ही गांव के आशिक खान उर्फ आशिक प्रधान व शाहिद खान उर्फ छोटे खान उर्फ छोटे प्रधान से माल लेने लगा। आशिक को स्पेशल सेल और छोटे को यूपी पुलिस ने दबोच लिया।

बाद में आरोपी ने पश्चिम बंगाल, झारखंड व नॉर्थ-ईस्ट के दूसरे राज्यों से अफीम मंगाकर खुद ही हेरोइन बनाकर बेचना शुरू कर दिया। इसकी वजह से उसकी लोकल ड्रग सप्लायरों से रंजिश भी हो गई। कई मामलों में उसका नाम आया तो स्पेशल सेल, लोकल पुलिस, क्राइम ब्रांच व यूपी पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी। लेकिन उसकी रॉबिन हुड की भूमिका के कारण वह पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा। 

आसपास के 15 से 20 गांव में उसकी भगवान की इमेज बनी हुई है। लोग उसे किसी भी कीमत पर गिरफ्तार नहीं होने देते थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही उसे फरार करवा दिया जाता था। बाद में वह या तो गन्ने के खेतों में छिपा रहता था या फिर लखीमपुर खीरी स्थित अपनी ससुराल में रहता था। आरोपी के मीठे बोलों के कारण लोग उसके जाल में फंस जाते थे। अभी उसकी इमेज देखकर कई गांवों के युवा भी उससे प्रभावित थे।
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