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दिल्ली में शुरू होगी नारको टेस्ट सुविधा
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नई दिल्ली। आप सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को जानकारी दी है कि राजधानी में नार्को टेस्ट शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। कोविड-19 महामारी पर नियंत्रण के बाद यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी। सरकार ने अदालत को बताया कि यह सुविधा रोहिणी स्थित डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल में शुरू होगी। मामले में अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी। दिल्ली सरकार के वकील ने बताया कि दिल्ली में यह इस तरह की पहली सुविधा होगी।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और रजनीश भटनागर की पीठ ने मंगलवार को दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील संजय लाओ की बात को दोहराते हुए कहा कि राजधानी में नार्को टेस्ट शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण अभी इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से इस मामले में अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था। अदालत ने पूछा था कि क्या दिल्ली में सुविधा स्थापित करने के लिए कोई कदम उठाया गया है।
यह मुद्दा अदालत के समक्ष तब सामने आया, जब अदालत एक पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता तेजबीर सिंह अपने 19 वर्षीय बेटे की तलाश में भटक रहा है। उनका पुत्र 17 सितंबर, 2018 से लापता है। उनकी ओर से पेश वकील सिद्धार्थ यादव ने अदालत से कहा कि पिता को अधिकारियों की बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है।
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याचिका में कहा गया कि लापता लड़का पहलवान बनना चाहता है। उसके पिता ने पुलिस को बताया था कि उसे अपने बेटे के लापता होने के पीछे व्यायामशाला के मालिक और चार अन्य लोगों पर शक है, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है, जिसके बाद उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया है कि इन सभी लोगों का नार्को टेस्ट भी नहीं कराया गया है। ऐसा लगता है कि संबंधित पुलिस अधिकारी आरोपियों का बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने अदालत से कहा कि दो संदिग्धों का परीक्षण किया गया है। शेष तीन संदिग्धों का नार्को टेस्ट बाकी है, क्योंकि यह प्रक्रिया महामारी के कारण अहमदाबाद में पूरी नहीं हो सकी।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और रजनीश भटनागर की पीठ ने मंगलवार को दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील संजय लाओ की बात को दोहराते हुए कहा कि राजधानी में नार्को टेस्ट शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण अभी इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से इस मामले में अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था। अदालत ने पूछा था कि क्या दिल्ली में सुविधा स्थापित करने के लिए कोई कदम उठाया गया है।
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यह मुद्दा अदालत के समक्ष तब सामने आया, जब अदालत एक पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता तेजबीर सिंह अपने 19 वर्षीय बेटे की तलाश में भटक रहा है। उनका पुत्र 17 सितंबर, 2018 से लापता है। उनकी ओर से पेश वकील सिद्धार्थ यादव ने अदालत से कहा कि पिता को अधिकारियों की बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है।
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याचिका में कहा गया कि लापता लड़का पहलवान बनना चाहता है। उसके पिता ने पुलिस को बताया था कि उसे अपने बेटे के लापता होने के पीछे व्यायामशाला के मालिक और चार अन्य लोगों पर शक है, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है, जिसके बाद उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया है कि इन सभी लोगों का नार्को टेस्ट भी नहीं कराया गया है। ऐसा लगता है कि संबंधित पुलिस अधिकारी आरोपियों का बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने अदालत से कहा कि दो संदिग्धों का परीक्षण किया गया है। शेष तीन संदिग्धों का नार्को टेस्ट बाकी है, क्योंकि यह प्रक्रिया महामारी के कारण अहमदाबाद में पूरी नहीं हो सकी।