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‘छोटे-मोटे झगड़े या कहासुनी ऐसे नहीं होते कि आत्महत्या के लिए उकसाना माना जाए’

Tue, 06 Apr 2021 01:46 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 06 Apr 2021 01:46 AM IST
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'Minor quarrels or arguments are not such that suicide is considered abetment'
नई दिल्ली। न्यायालय की प्रवृत्ति यह नहीं होनी चाहिए कि शादी के बाद किसी लड़की की मृत्यु हो गई थी, तो अब किसी को तो दोषी ठहराना है और किसी की गर्दन में फंदा जरूर फिट किया जाना चाहिए। अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए दहेज प्रताड़ना व आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से सास, पति व देवर को आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि विवाह के बाद शुरुआती दिनों में परिवार में होने वाले छोटे-मोटे झगड़े या कहासुनी ऐसे नहीं होते हैं कि उन्होंने महिला को इस हद तक प्रताड़ित कर दिया था कि वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गई थी। देशबंधु गुप्ता मार्ग थाना क्षेत्र के इस मामले में तीनों आरोपियों पर नवविवाहिता को दहेज के लिए प्रताड़ित व आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। मृतका ने विवाह के एक माह बाद ही आत्महत्या कर ली थी।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चारू अग्रवाल ने 8 मार्च को दिए अपने फैसले में कहा कि यदि एक लड़की अपनी शादी के कुछ दिनों या महीने के भीतर अप्राकृतिक परिस्थितियों में आत्महत्या कर लेती है, तो कानून लड़के के परिवार के खिलाफ अनुमान लगाता है। अदालत ने कहा कि क्या यह लड़की की अति संवेदनशीलता को नहीं दिखाता है जिसने इस पवित्र रिश्ते को समय ही नहीं दिया।
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मामला वर्ष 2014 का है। नवविवाहित राजवती ने 11 जनवरी 2014 को शादी के एक महीने के भीतर ससुराल में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। राजवती की मां के बयान पर पति विजय, देवर मनोज कुमार व सास लाजवंती के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अदालत ने अपने फैसले में रोम की एक कहावत का उदाहरण देते हुए कहा कि रोम एक दिन में नहीं बना था। अदालत ने कह कि उक्त कहावत सही मायने में दो व्यक्तियों के बीच विवाह पर भी लागू होती है। कोर्ट ने कहा कि एक सफल विवाह में एक-दूसरे के प्यार, सम्मान, आपसी समझ और विश्वास की आवश्यकता होती है। ये सभी कारक दो व्यक्तियों को एक या दो दिन में नहीं, बल्कि एक ही छत के नीचे बिताए गए समय के साथ एक कपल बनाते हैं। शादी के शुरुआती दिनों में सभी नहीं, लेकिन अधिकांश विवाह चाहे वह लव मैरिज हो या फिर अरेंज मैरिज, विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। शादी के बाद बहुत सी चीजें बदल जाती हैं, भले ही वह प्रेम विवाह क्यों न हो। इन चुनौतियों का समाधान लड़का और लड़की दोनों के हाथों में समान रूप से होता है और उक्त समाधान केवल दंपति का धैर्य और शांति है।
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अदालत ने कहा कि पेश गवाहों ने दहेज की मांग व प्रताड़ना के कारण उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, परंतु उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मृतका को किस तरह से परेशान किया गया। सुसाइड नोट का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह नोट केवल इस बात को दर्शाता है कि मृतका और उसके पति के बीच कुछ गलतफहमी थी और कुछ भी नहीं। इसमें स्पष्ट नहीं है कि उसे प्रताड़ित किया गया या आत्महत्या के लिए उकसाया गया।
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