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कोचिंग इंस्टीट्यूट के लिए वेबसाइट और एप बनाने के नाम पर धोखाधड़ी
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नई दिल्ली। मुखर्जी नगर में कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाने वाले एक शख्स ने दो लोगों पर ऑनलाइन पढ़ाई के लिए वेबसाइट और एप बनाने के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। साथ ही कोचिंग इंस्टीट्यूट के नाम से बनाये गये एप का खुद इस्तेमाल कर आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुखर्जी नगर में रहने वाले धर्मेंद्र कुमार डीएसएल इंग्लिश के नाम से कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाते हैं। पुलिस को दी शिकायत में धर्मेंद्र ने बताया कि दो साल पहले उनके कोचिंग इंस्टीट्यूट में मनोहर कुमार और अश्वनी कुमार आये। दोनों ने ऑनलाइन कोचिंग के लिए इंस्टीट्यूट की वेबसाइट तैयार करने की बात कही। इसके लिए उन लोगों ने पचास हजार रुपये मांगे। धर्मेंद्र ने कुछ पैसे उन्हें दे दिये। लेकिन वह वेबसाइट तैयार नहीं कर पाये।
फिर दोनों ने इंस्टीट्यूट के लिए मोबाइल एप्लीकेशन तैयार करने और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी निभाने की बात कही और दो लाख रुपये मांगे। धर्मेंद्र ने उन्हें पैसे दे दिये। एप्लीकेशन बनाने की लागत दो लाख रुपये आई। इसके अलावा उनके बीच एप्लीकेशन पर पढ़ाई से होने वाली आमदनी का दस फीसदी देेने का सौदा हुआ। आरोपियों से एप्लीकेशन की देखरेख के लिए इंस्टीट्यूट को कर्मचारी मुहैया करने की बात कही गयी लेकिन आरोपियों ने कोई कर्मचारी मुहैया नहीं करवाया।
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जांच पड़ताल करने पर पता चला कि आरोपियों ने मोबाइल एप्लीकेशन को अपनी कंपनी पराशर टेक्नोलॉजी के नाम पर रजिस्टर्ड कर लिया था। इस बारे में पूछे जाने पर उन लोगों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कुछ दिनों के बाद एप्लीकशन को लेकर छात्रों की शिकायत आने लगी। आरोपियों ने इन शिकायतों को दूर नहीं किया और पीड़ित का फोन उठाना बंद कर दिया। तब पीड़ित ने दूसरी एप्लीकेशन तैयार करवा ली।
आरोप है कि उसके बाद आरोपियों ने इंस्टीट्यूट के यूट्यूब पर डाले गये सारे वीडियो डिलिट कर दिये। यहां तक कि आरोपियों ने इंस्टीट्यूट के अकाउंट को हैक कर उसका पासवर्ड बदल दिया। जिससे एप्लीकेशन पर काम करना मुश्किल हो गया। इससे इंस्टीट्यूट को आर्थिक नुकसान हुआ है। साथ ही आरोपी इंस्टीट्यूट के एप का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।
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मुखर्जी नगर में रहने वाले धर्मेंद्र कुमार डीएसएल इंग्लिश के नाम से कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाते हैं। पुलिस को दी शिकायत में धर्मेंद्र ने बताया कि दो साल पहले उनके कोचिंग इंस्टीट्यूट में मनोहर कुमार और अश्वनी कुमार आये। दोनों ने ऑनलाइन कोचिंग के लिए इंस्टीट्यूट की वेबसाइट तैयार करने की बात कही। इसके लिए उन लोगों ने पचास हजार रुपये मांगे। धर्मेंद्र ने कुछ पैसे उन्हें दे दिये। लेकिन वह वेबसाइट तैयार नहीं कर पाये।
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फिर दोनों ने इंस्टीट्यूट के लिए मोबाइल एप्लीकेशन तैयार करने और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी निभाने की बात कही और दो लाख रुपये मांगे। धर्मेंद्र ने उन्हें पैसे दे दिये। एप्लीकेशन बनाने की लागत दो लाख रुपये आई। इसके अलावा उनके बीच एप्लीकेशन पर पढ़ाई से होने वाली आमदनी का दस फीसदी देेने का सौदा हुआ। आरोपियों से एप्लीकेशन की देखरेख के लिए इंस्टीट्यूट को कर्मचारी मुहैया करने की बात कही गयी लेकिन आरोपियों ने कोई कर्मचारी मुहैया नहीं करवाया।
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जांच पड़ताल करने पर पता चला कि आरोपियों ने मोबाइल एप्लीकेशन को अपनी कंपनी पराशर टेक्नोलॉजी के नाम पर रजिस्टर्ड कर लिया था। इस बारे में पूछे जाने पर उन लोगों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कुछ दिनों के बाद एप्लीकशन को लेकर छात्रों की शिकायत आने लगी। आरोपियों ने इन शिकायतों को दूर नहीं किया और पीड़ित का फोन उठाना बंद कर दिया। तब पीड़ित ने दूसरी एप्लीकेशन तैयार करवा ली।
आरोप है कि उसके बाद आरोपियों ने इंस्टीट्यूट के यूट्यूब पर डाले गये सारे वीडियो डिलिट कर दिये। यहां तक कि आरोपियों ने इंस्टीट्यूट के अकाउंट को हैक कर उसका पासवर्ड बदल दिया। जिससे एप्लीकेशन पर काम करना मुश्किल हो गया। इससे इंस्टीट्यूट को आर्थिक नुकसान हुआ है। साथ ही आरोपी इंस्टीट्यूट के एप का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।