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अल्जाइमर से बचाव के लिए लूडो और सुडोकू कारगर
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नई दिल्ली। भूलने की बीमारी अल्जाइमर से बचाव के लिए सुडोकू या लूडो जैसे खेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन्हें रोजाना खेलने से अल्जाइमर को कमजोर किया जा सकता है। मनोचिकित्सक एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. आरपी पाराशर का कहना है कि भागमभाग और तनाव भरी जिंदगी में अक्सर लोगों को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह रोग आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ अधिक होता है।
उन्होंने कहा कि डिमेंशिया रोग का भी मुख्य कारण अल्जाइमर है जिसमें हमारे सोचने-समझने व कार्य करने की शक्ति प्रभावित होती है। वहीं, अपने दैनिक कार्यों का निर्वहन भी हम भली भांति नहीं कर पाते हैं। इस रोग से बचाव के लिए आवश्यक है कि हम शारीरिक सक्रियता को बढ़ाएं, नियमित रूप से व्यायाम करें। पौष्टिक और संतुलित भोजन के अलावा पर्याप्त नींद लें और रक्तचाप को नियंत्रित रखें।
आईएमए आयुष संगठन से जुड़े डॉ. पाराशर ने बताया कि सुडोकू, भूल-भुलैया, बिंदुओं को जोड़ कर आकृति बनाने और अंतर बताओ जैसी क्रियाओं का निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए। इसके अलावा सांप-सीढ़ी, लूडो और चेस जैसे इंडोर गेम खेलने से भी इस रोग से बचाव और उपचार में सहायता मिलती है।
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इतना ही नहीं, आयुर्वेद में उल्लेखित शंखपुष्पी, ब्राह्मी, अश्वगंधा जटामांसी और स्मृति सागर रस जैसी आयुर्वेदिक दवाएं इस रोग से बचाव और इलाज में पूरी तरह कारगर हैं। अश्वगंधा का लगातार प्रयोग किसी भी उम्र में पूरी तरह से सुरक्षित है।
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उन्होंने कहा कि डिमेंशिया रोग का भी मुख्य कारण अल्जाइमर है जिसमें हमारे सोचने-समझने व कार्य करने की शक्ति प्रभावित होती है। वहीं, अपने दैनिक कार्यों का निर्वहन भी हम भली भांति नहीं कर पाते हैं। इस रोग से बचाव के लिए आवश्यक है कि हम शारीरिक सक्रियता को बढ़ाएं, नियमित रूप से व्यायाम करें। पौष्टिक और संतुलित भोजन के अलावा पर्याप्त नींद लें और रक्तचाप को नियंत्रित रखें।
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आईएमए आयुष संगठन से जुड़े डॉ. पाराशर ने बताया कि सुडोकू, भूल-भुलैया, बिंदुओं को जोड़ कर आकृति बनाने और अंतर बताओ जैसी क्रियाओं का निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए। इसके अलावा सांप-सीढ़ी, लूडो और चेस जैसे इंडोर गेम खेलने से भी इस रोग से बचाव और उपचार में सहायता मिलती है।
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इतना ही नहीं, आयुर्वेद में उल्लेखित शंखपुष्पी, ब्राह्मी, अश्वगंधा जटामांसी और स्मृति सागर रस जैसी आयुर्वेदिक दवाएं इस रोग से बचाव और इलाज में पूरी तरह कारगर हैं। अश्वगंधा का लगातार प्रयोग किसी भी उम्र में पूरी तरह से सुरक्षित है।