फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Locking someone in a room is the same crime as tying hands and imprisoning: High Court

कमरे में बंद करना भी हाथ बांधकर कैद करने जैसा ही अपराध : हाईकोर्ट

Tue, 22 Jul 2025 09:11 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jul 2025 09:11 PM IST
विज्ञापन
Locking someone in a room is the same crime as tying hands and imprisoning: High Court
न्यायमूर्ति गिरिश कथपालिया की खंडपीठ ने सुनाया फैसला
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 342 के तहत गलत कैद के अपराध के लिए यह जरूरी नहीं है कि पीड़ित के हाथ बांधे जाएं। कोर्ट ने माना कि किसी व्यक्ति को कमरे में बंद करना भी इस अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त माना जाएगा।

यह फैसला न्यायमूर्ति गिरिश कथपालिया की खंडपीठ ने सुनाया। मामला एक महिला की शिकायत पर आधारित था, जो एक कंपनी में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। महिला ने आरोप लगाया कि कंपनी के मालिक ने उसे शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में पत्नी के साथ मिलकर उसे अपने घर में बंद कर पीटा। पीड़िता के बयान पर शिकायत दर्ज की गई। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने प्रतिवादियों को धारा 323 और 342 से बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के एमएलसी (मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट) में चोटों का उल्लेख न होना उसके बयान को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के स्पष्ट बयान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कमरे में बंद करना भी धारा 342 के तहत प्रथम दृष्टया अपराध को साबित करने के लिए काफी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल के दौरान ही यह पता चलेगा कि चोटें क्यों नहीं दिखीं, न कि चार्ज के चरण में इसका गहन विश्लेषण करना उचित होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed