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दिल्ली और पांच हजार में गुजारा, कैसे संभव
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 22 Dec 2016 09:40 AM IST
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पांच हजार रुपये में दिल्ली जैसे महानगर में कोई विलासितापूर्ण जिंदगी नहीं जी सकता। यह टिप्पणी अदालत ने एक शख्स की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की है। इस शख्स ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पत्नी को हर माह पांच हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश याची को दिया था।
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साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश कुमार शर्मा ने कहा कि पांच हजार रुपये में याची की पत्नी केवल रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर पाएगी। इससे उसे कोई विलासिता की जिंदगी नहीं मिलेगी। याचिका को रद्द किया जाता है क्योंकि निचली अदालत के आदेश में कोई गलती नहीं है।
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घरेलू हिंसा के मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट में अंतरिम आदेश देते हुए हर माह पांच हजार रुपये महीना गुजारा भत्ता देने का निर्देश पति को 16 जनवरी 2015 को दिया था।
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याची ने फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि उसकी पत्नी ने उगाही के लिए झूठा केस दायर किया था जबकि वह खुद हर माह 20 हजार रुपये महीना कमाती है।