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वकीलों ने अदालत परिसरों में किसानों के समर्थन में किया प्रदर्शन
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नई दिल्ली। राजधानी की जिला अदालतों में मंगलवार को वकीलों ने प्रदर्शन व बैठकें कर किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया। इस अवसर पर वकीलों ने केंद्र सरकार पर असामाजिक तत्वों के नाम पर किसानों को बदनाम करने का आरोप लगाया। वकीलों ने कहा कि यदि सरकार किसानों का भला चाहती है तो उन्हें एमएसपी से ज्यादा राशि दिलवाए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान करे।
बार काउंसिल ऑफ दिल्ली एक्शन कमेटी के मुख्य समन्वयक राजीव खोसला व ऑल दिल्ली बार एसोसिएशन की समन्वय कमेटी के चेयरमैन संजीव नसियार ने कहा कि कानूनी बिरादरी पूरी तरह किसानों के साथ है। तीस हजारी अदालत परिसर में आयोजित सभा में उन्होंने कहा किसान को बदनाम करने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न संगठनों का नाम ले रही है।
उन्होंने कहा हम सरकार के इस कदम की निंदा करते हैं। आज किसान अपनी जायज मांगो को लेकर सड़क पर हैं और सरकार को तुरंत उनकी मांगे मान लेनी चाहिए। किसान बिल अनुचित, मनमाना और अन्यायपूर्ण है। यदि सरकार किसानों का भला चाहती है तो ऐसे प्रावधान करे कि किसानों को एमएसपी से पांच प्रतिशत अधिक राशि मिले।
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इसके अलावा यदि निजी कंपनियां किसान की फसल का न्यूनतम मूल्य न दें तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के तहत तीन से पांच वर्ष कैद की सजा का प्रावधान किया जाए। इस अवसर पर वकीलों ने प्रदर्शन करने के अलावा अदालत परिसर में जलूस निकाल कर जय जवान-जय किसान के नारे लगाए। खोसला ने कहा कि किसानों के खिलाफ यदि झूठे मामले दर्ज किए गए तो वकील उन्हें निशुल्क कानूनी सहायता देंगे।
उन्होंने कहा कि यदि किसानों की मांगों को न माना गया तो वकीलों की एक्शन कमेटी जल्द ही अखिल भारतीय स्तर पर आंदोलन का आह्वान करेगी और कई स्टेट बार काउंसिल और बार एसोसिएशनों के साथ सलाह-मशविरा कर अखिल भारतीय आंदोलन की तारीख तय करेगी।
इस अवसर पर बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के उपाध्यक्ष हिमाल अख्तर और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य जगदेव भी उपस्थित थे। बैठक में हरियाणा किसान यूनियन के प्रवक्ता राज सिंह दलाल भी शामिल हुए।
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बार काउंसिल ऑफ दिल्ली एक्शन कमेटी के मुख्य समन्वयक राजीव खोसला व ऑल दिल्ली बार एसोसिएशन की समन्वय कमेटी के चेयरमैन संजीव नसियार ने कहा कि कानूनी बिरादरी पूरी तरह किसानों के साथ है। तीस हजारी अदालत परिसर में आयोजित सभा में उन्होंने कहा किसान को बदनाम करने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न संगठनों का नाम ले रही है।
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उन्होंने कहा हम सरकार के इस कदम की निंदा करते हैं। आज किसान अपनी जायज मांगो को लेकर सड़क पर हैं और सरकार को तुरंत उनकी मांगे मान लेनी चाहिए। किसान बिल अनुचित, मनमाना और अन्यायपूर्ण है। यदि सरकार किसानों का भला चाहती है तो ऐसे प्रावधान करे कि किसानों को एमएसपी से पांच प्रतिशत अधिक राशि मिले।
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इसके अलावा यदि निजी कंपनियां किसान की फसल का न्यूनतम मूल्य न दें तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के तहत तीन से पांच वर्ष कैद की सजा का प्रावधान किया जाए। इस अवसर पर वकीलों ने प्रदर्शन करने के अलावा अदालत परिसर में जलूस निकाल कर जय जवान-जय किसान के नारे लगाए। खोसला ने कहा कि किसानों के खिलाफ यदि झूठे मामले दर्ज किए गए तो वकील उन्हें निशुल्क कानूनी सहायता देंगे।
उन्होंने कहा कि यदि किसानों की मांगों को न माना गया तो वकीलों की एक्शन कमेटी जल्द ही अखिल भारतीय स्तर पर आंदोलन का आह्वान करेगी और कई स्टेट बार काउंसिल और बार एसोसिएशनों के साथ सलाह-मशविरा कर अखिल भारतीय आंदोलन की तारीख तय करेगी।
इस अवसर पर बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के उपाध्यक्ष हिमाल अख्तर और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य जगदेव भी उपस्थित थे। बैठक में हरियाणा किसान यूनियन के प्रवक्ता राज सिंह दलाल भी शामिल हुए।