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Delhi Jahangirpuri Violence: उपद्रवियों ने ट्रक से लूटा राशन, दुकानों से नकदी, हिंसा की तपिश में जलती रहीं जहांगीरपुरी की गलियां

Mon, 18 Apr 2022 05:12 AM IST
अनुराग सक्सेना सर्वेश कुमार, नई दिल्ली। 
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली।  Published by: अनुराग सक्सेना Updated Mon, 18 Apr 2022 05:12 AM IST
सार

शनिवार शाम उत्तर पश्चिमी दिल्ली का जहांगीरपुरी का इलाका हिंसा की तपिश से जल रहा था। दो समुदायों के बीच संघर्ष में पत्थरबाजी का सिलसिला लगातार चलता रहा। इस दौरान कई गलियां में भी पथराव किया गया और जहां भी वाहन दिखे तोड़फोड़ करने लगे।

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Jahangirpuri Violence Case: Miscreants looted ration from truck, cash from shops
जहांगीरपुरी में अभी भी फैला है तनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हनुमान जयंती पर जहांगीरपुरी में हुई हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने कई घंटों तक कहर बरपाया। वाहनों को क्षतिग्रस्त किया तो स्कूटी को आग के हवाले कर दिया। उपद्रवियों ने ट्रक से राशन के कई कट्टे समेत दो तीन दुकानों से नकदी भी लूट ले गए। कहर बरपाने वालों ने छोटे भटूरे और मोमोज की रेहड़ियां को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान सभी गलियों और सड़कों पर पथराव होता रहा। दफ्तर और जरूरी काम से लौटने वालों को यह पता भी नहीं था कि हिंसा के बाद का कैसा माहौल हो।

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शनिवार शाम उत्तर पश्चिमी दिल्ली का जहांगीरपुरी का इलाका हिंसा की तपिश से जल रहा था। दो समुदायों के बीच संघर्ष में पत्थरबाजी का सिलसिला लगातार चलता रहा। इस दौरान कई गलियां में भी पथराव किया गया और जहां भी वाहन दिखे तोड़फोड़ करने लगे और मौका मिलने पर कुछ वाहनों को आगे के हवाले भी कर दिया।

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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उपद्रवियों की संख्या अधिक होने की वजह से उन्हें रोकना मुश्किल था। दुकान से नकदी की लूट होने के बाद दहशतजदा होकर करीब 40 मिनट तक दुकान के अंदर ही बंद रहा। उपद्रवियों ने इस दौरान दुकान के बाहर खड़े राशन से लदे हुए ट्रक से गेहूं के कुछ कट्टे भी लूटकर अपने साथ ले गए। एक महिला ने बताया कि उनका बेटा फिलहाल गांव में है, लेकिन बाहर खड़ी रेहड़ी को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया। रेहड़ी के जलाए जाने पर महिला ने कहा कि किसी तरह से इससे परिवार का गुजारा कर रहे थे। अब तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगे। जहांगीरपुरी में हुई इस तरह की घटना के बाद हालात को सामान्य बनाने के लिए दोनों समुदायों की तरफ से अमन और शांति कायम करने की कोशिश चल रही हैं।

पथराव और हिंसक झड़क की शुरुआत शनिवार शाम करीब 6 बजे हुई। इस दौरान अधिकतर घरों से नौकरी पेशा लोग अपने घरों के लिए लौट रहे थे, लेकिन शाम तक हालात इतने बिगड़ चुके थे कि कुछ लोग अपने घरों से बाहर ही रिश्तेदारों के घर ही शनिवार रात रुक गए। पुलिस ने हनुमान जयंती के मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए थे और हालात को काबू करने के दौरान पुलिस कर्मियों को भी चोटें आईं।

हिंसा के बाद रात में रिश्तेदार के घर रुकी महिला

एक महिला विमला ने बताया कि शाम को अपने रिश्तेदार के घर गई थीं। वहां पहुंचने के कुछ देर बात घर से फोन आया कि यहां हालात खराब हो गए हैं। इसके बाद मैं रिश्तेदार के घर पर ही रुकी और सुबह लौटने पर सड़क और गलियां में हर तरफ अफरा तफरी की स्थिति दिखी। 

घायल पुलिस कर्मियों को इलाज के बाद भेजा, एक एसआई रेफर

आशीष और नरेंद्र ने बताया कि शोभा यात्रा में शामिल लोगों का पीछा करने वालों के हाथों में भी हथियार और पत्थर थे। जिसे जहां मौका मिला एक ने दूसरे पर हमला बोल दिया। इसमें कुछ पुलिस कर्मियों को भी चोटें आईं, जिन्हें बाबू जगजीवन राम अस्प्ताल में इलाज के लिए ले जाया गया था। इनमें से गंभीर रूप से घायल एक एसआई को अंबेडकर अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

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रेहड़ियां लगाने से हिचकते नजर आए दुकानदार, सताती रही चिंता 

हिंसा से सहमे दुकानदार रविवार को भी सड़कों पर रेहड़ी लगाने से पहले एक दूसरे से पूछ रहे थे। उन्हें डर था कि कहीं दोबार ऐसे हालात हुए तो कैसे निपटेंगे। रविवार दोपहर बाद से जहांगीरपुरी की सड़क पर सब्जियों की रेहड़ी लगाने वाले एक दूसरे से पूछते नजर आए। दो रेहड़ियों में आग लगाने से चिंतित दुकानदार सोच रहे थे कि कहीं उनके साथ भी ऐसी घटना न दोहराए। 

गलियों के बंद गेट से हिंसा की बचे निशां को झांकते रहे बच्चे

एक दिन पहले हुई हिंसा की घटना के बाद सुरक्षा के लिहाज से अधिकतर गलियों के गेट बंद कर दिए गए थे। जिन्हें जरूरी काम  था दूसरे रास्तों से बाहर गए। जिसे जहां जगह मिली, गेट के अंदर से झांकते नजर आए। हर तरफ पुलिस कर्मियों की तैनाती और इस दौरान शांति की अपील करते हुए  कुछ लोग। गलियों के बाहर कबाड़ का ढेर था तो अंदर इतनी भीड़ थी कि गेट से बाहर का नजारा देखते रहे।

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