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खेत और बरात घर में अभ्यास कर रहे हैं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी
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आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोविड-19 ने देश के लिए मेडल जीतकर लाने वाले खिलाड़ियों के जीवन को भी खासा प्रभावित किया है। राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर राजधानी के कई युवा अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह महामारी के कारण अपने खेतों तथा बरात घर में अभ्यास कर रहे हैं। अब अनलॉक शुरू होने के साथ इन्होंने फिर से किसी तरह अभ्यास शुरू किया है।
नांगलोई निवासी अंतरराष्ट्रीय आर्चरी खिलाड़ी अमन सैनी ने 2016 से अब तक देश के लिए नौ मेडल जीते हैं। अमन जून के अंत तक घर में ही रहे। जुलाई से उन्होंने मंगोलपुरी के सैनी बरात घर में निजी बातचीत के बाद अभ्यास शुरू किया है। यहां वो अकेले अभ्यास करते हैं और खुद को मानसिक तौर पर मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस साल दिल्ली सरकार की स्कॉलरशिप नहीं मिली है।
आर्चरी एशिया कप-2018 में भारतीय जूनियर टीम का हिस्सा रहे बवाना निवासी पदम सेहरावत घर से लगभग चार किमी दूर खेतों में अभ्यास के लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि स्टेट लेवल टूर्नामेंट के लिए मार्च में ट्रायल होना था लेकिन लॉकडाउन के बाद नहीं हो सका। अब पांच महीने बाद उन्हें भी विपरीत आर्थिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। वह स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया की स्कीम के तहत रोजगार पाने का प्रयास कर रहे हैं।
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नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोविड-19 ने देश के लिए मेडल जीतकर लाने वाले खिलाड़ियों के जीवन को भी खासा प्रभावित किया है। राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर राजधानी के कई युवा अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह महामारी के कारण अपने खेतों तथा बरात घर में अभ्यास कर रहे हैं। अब अनलॉक शुरू होने के साथ इन्होंने फिर से किसी तरह अभ्यास शुरू किया है।
नांगलोई निवासी अंतरराष्ट्रीय आर्चरी खिलाड़ी अमन सैनी ने 2016 से अब तक देश के लिए नौ मेडल जीते हैं। अमन जून के अंत तक घर में ही रहे। जुलाई से उन्होंने मंगोलपुरी के सैनी बरात घर में निजी बातचीत के बाद अभ्यास शुरू किया है। यहां वो अकेले अभ्यास करते हैं और खुद को मानसिक तौर पर मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस साल दिल्ली सरकार की स्कॉलरशिप नहीं मिली है।
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आर्चरी एशिया कप-2018 में भारतीय जूनियर टीम का हिस्सा रहे बवाना निवासी पदम सेहरावत घर से लगभग चार किमी दूर खेतों में अभ्यास के लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि स्टेट लेवल टूर्नामेंट के लिए मार्च में ट्रायल होना था लेकिन लॉकडाउन के बाद नहीं हो सका। अब पांच महीने बाद उन्हें भी विपरीत आर्थिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। वह स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया की स्कीम के तहत रोजगार पाने का प्रयास कर रहे हैं।
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