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Delhi News : तिहाड़ प्रशासन की पहल, विचाराधीन कैदी भी अब जेल में करेंगे काम
Mon, 25 Jul 2022 03:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राजीव कुमार, नई दिल्ली
राजीव कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 25 Jul 2022 03:49 AM IST
सार
जेल प्रशासन विचाराधीन कैदियों को हुनरमंद बनाने पर विचार कर रहा है। इसका मकसद विचाराधीन कैदियों को अपराध से दूर करना और उन्हें समाज की मुख्य धारा में वापस लाना है।
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tihar jail
- फोटो : PTI
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विस्तार
तिहाड़ में अब विचाराधीन कैदी भी काम करेंगे। जेल प्रशासन विचाराधीन कैदियों को हुनरमंद बनाने पर विचार कर रहा है। इसका मकसद विचाराधीन कैदियों को अपराध से दूर करना और उन्हें समाज की मुख्य धारा में वापस लाना है।
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तिहाड़ जेल में बंद 80 फीसदी विचाराधीन कैदी हैं। इन कैदियों को जेल प्रशासन कोई न कोई हुनर सिखाने पर विचार कर रहा है। ताकि जेल से निकलने के बाद यह कैदी अपराध से दूर रहकर अपना कोई काम कर खुद और परिवार का जीविकोपार्जन कर सकें। कौशल विकास योजना के तहत कैदियों को काम सिखाया जाएगा। कई स्वयं सेवी संस्थाएं तिहाड़ जेल से जुड़ी हैं और वे कैदियों को कई तरह के प्रशिक्षण देती हैं। उन्हें तीन माह का प्रमाण पत्र भी देती हैं।
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तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेल में अभी क्षमता से दोगुने करीब 20 हजार कैदी बंद हैं। इसमें से 80 फीसदी कैदी विचाराधीन हैं। जो जेल में आते हैं और कुछ दिन बाद जमानत होने पर जेल से निकल जाते हैं। बाहर जाकर फिर से आपराधिक वारदात को अंजाम देने लगते हैं। इनसे बातचीत करने पर पता चला कि इनके पास किसी काम का हुनर नहीं है। इस वजह से जेल से निकलने के बाद उनके पास आपराधिक वारदात को अंजाम देने के अलावा कोई चारा नहीं होता है।
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जेल प्रशासन ने इन कैदियों को भी हुनरमंद बनाने की पहल शुरू कर दी है। जेल अधिकारियों का कहना है कि अब तक सजायाफ्ता कैदी ही जेल में काम सीखकर जेल की फैक्टरी में काम करते थे, लेकिन अब विचाराधीन कैदी भी अपना मनपसंद काम सीख सकेंगे। ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद वह अपना कोई कामकाज शुरू कर सकें और अपराध की तरफ जाने से बचे। तिहाड़ जेल में केक बनाने से लेकर बिस्कुट, एलईडी बल्ब, अचार, फर्नीचर, कंबल से लेकर डिजाइनर कपड़े तक बनाने की अलग-अलग यूनिट हैं। जेल परिसर के 400 एकड़ में अलग-अलग यूनिट हैं, जिसमें कैदी काम करते हैं। अब इन इकाइयों में विचाराधीन कैदी भी मनपसंद काम सीख सकेंगे।
दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विवि से करार
तिहाड़ जेल में बंद कैदियों को हुनरमंद बनाने के लिए जेल प्रशासन ने दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय से करार किया है। विश्वविद्यालय ने नए पाठ्यक्रम की शुरूआत की है। इस पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद कैदियों को रिहा होने पर रोजगार मुहैया हो सकेगा। इस पहल से कैदियों के दीर्धकालिक पुनर्वास एवं समाज की मुख्य धारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को अपराध से दूर रखने का प्रयास है। सभी कैदियों को एक साथ काम करवाना संभव नहीं है। उन्हें हुनरमंद बनाकर समाज के मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है।
-संदीप गोयल, महानिदेशक, तिहाड़ जेल