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भारतीय रेल: अनाकोंडा और शेषनाग के बाद अब दौड़ी वसुकी नाग, साढ़े तीन किलोमीटर लंबी है ट्रेन
Sat, 23 Jan 2021 10:50 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 23 Jan 2021 10:50 PM IST
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वासुकी नाग ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
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रेलवे ने देश की सबसे लंबी ट्रेन वासुकी चलाकर एक और कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। यह ट्रेन साढ़े तीन किलोमीटर लंबी है और इसे पांच इंजन खींच रहे हैं। पांचों इंजन की तालमेल के लिए इसे इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल से जोड़ा गया है ताकि बेहतर सामंजस्य बनाकर 295 डिब्बों को पटरी पर दौड़ाया जा सके।
रेलवे ने एक तरफ देश की सबसे तेज गति से चलने वाली वंदे भारत ट्रेन सेट वाली 44 ट्रेन निर्माण करने के लिए ठेका दे दिया है, तो दूसरी तरफ वासुकी नाग नाम की सबसे लंबी मालगाड़ी चलाकर रिकॉर्ड बनाया है।
इसके पहले भारत में जो सबसे लंबी ट्रेन चली है उसे शेषनाग का नाम दिया गया था। इसे चार ट्रेनों को जोड़कर चलाया गया था। इसके भी पूर्व तीन ट्रेनों को जोड़कर अनाकोंडा ट्रेन चलाई गई थी। इससे भी आगे बढ़ते हुए रेलवे वासुकी नाग के नाम पर ट्रेन को चला रही है। यह ट्रेन रायपुर रेल मंडल के भिलाई से विलासपुर रेलमंडल के कोरबा के लिए चली है।
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खाली मालगाड़ी के डिब्बे को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए इस तरह की ट्रेन चलाई गई है, जो अपने आप में एक अनूठा रिकॉर्ड है। उल्लेखनीय है कि मालगाड़ी के लिए अलग से बनी ट्रैक जिसे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर का नाम दिया गय है उसका भी दावा है कि डेढ़ किलोमीटर की ट्रेन चलेगी। जबकि इसे आगे बढ़ते हुए रेलवे ने साढ़े तीन किलोमीटर लंबी ट्रेन चलाकर इतिहास रचा है।
इस तरह फ्रेट ट्रेनों के परिचालन समय को कम करने, स्टाफ की बचत और उपभोक्ताओं को त्वरित डिलीवरी प्रदान करने के लिए लांग हॉल मालगाड़ियों का परिचालन किया जा रहा है।
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रेलवे ने एक तरफ देश की सबसे तेज गति से चलने वाली वंदे भारत ट्रेन सेट वाली 44 ट्रेन निर्माण करने के लिए ठेका दे दिया है, तो दूसरी तरफ वासुकी नाग नाम की सबसे लंबी मालगाड़ी चलाकर रिकॉर्ड बनाया है।
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इसके पहले भारत में जो सबसे लंबी ट्रेन चली है उसे शेषनाग का नाम दिया गया था। इसे चार ट्रेनों को जोड़कर चलाया गया था। इसके भी पूर्व तीन ट्रेनों को जोड़कर अनाकोंडा ट्रेन चलाई गई थी। इससे भी आगे बढ़ते हुए रेलवे वासुकी नाग के नाम पर ट्रेन को चला रही है। यह ट्रेन रायपुर रेल मंडल के भिलाई से विलासपुर रेलमंडल के कोरबा के लिए चली है।
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खाली मालगाड़ी के डिब्बे को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए इस तरह की ट्रेन चलाई गई है, जो अपने आप में एक अनूठा रिकॉर्ड है। उल्लेखनीय है कि मालगाड़ी के लिए अलग से बनी ट्रैक जिसे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर का नाम दिया गय है उसका भी दावा है कि डेढ़ किलोमीटर की ट्रेन चलेगी। जबकि इसे आगे बढ़ते हुए रेलवे ने साढ़े तीन किलोमीटर लंबी ट्रेन चलाकर इतिहास रचा है।
इस तरह फ्रेट ट्रेनों के परिचालन समय को कम करने, स्टाफ की बचत और उपभोक्ताओं को त्वरित डिलीवरी प्रदान करने के लिए लांग हॉल मालगाड़ियों का परिचालन किया जा रहा है।