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Hindi News ›   Delhi ›   In Bhagya Vihar of Mundka eight persons are giving education to the children of poor sections.

Umeed Ki Mashal : बच्चों के शैक्षिक ज्ञान को निखार रहे हैं समाज के प्रहरी, मंदिर में जलती है सेवा की मशाल

Mon, 30 May 2022 05:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 30 May 2022 05:10 AM IST
सार

कोई ड्राइवर तो कोई पेंटर, छह लोग मिलकर भाग्य विहार के मंदिर में पढ़ा रहे नि:शुल्क ट्यूशन। इन्होंने बच्चों की बेसिक शिक्षा ठीक करने का बीड़ा उठाया है। मौजूदा समय ये करीब 120 बच्चों को नि:शुल्क ट्यूशन पढ़ा रहे हैं।

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In Bhagya Vihar of Mundka eight persons are giving education to the children of poor sections.
शिक्षा की अलख... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुंडका के भाग्य विहार में समाज के आठ प्रहरी गरीब तबके के बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। इन्होंने बच्चों की बेसिक शिक्षा ठीक करने का बीड़ा उठाया है। मौजूदा समय ये करीब 120 बच्चों को नि:शुल्क ट्यूशन पढ़ा रहे हैं।

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भाग्य विहार कॉलोनी के शिव मंदिर में दोपहर 3 से रात 8 बजे तक बच्चों की रोजाना नि:शुल्क ट्यूशन कक्षाएं चलती हैं। यहां बच्चों को गिनती, पहाड़ा, हिंदी, अंग्रेजी वर्णमाला ज्ञान, लिखना, पढ़ना सिखाया जाता है। भाग्य विहार के निवासी सोनू राजौरिया इसका संचालन करते हैं। पेशे से पेंटर पिंकेश, टैक्सी ड्राइवर अनिल गुप्ता, सैलून संचालक किताब सिंह, ओय रिक्शा कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर राहुल पांडेय, बीए द्वितीय वर्ष के छात्र अंकित पांडेय और प्राइवेट नौकरी कर रहीं आयशा अपने काम से खाली समय निकालकर इस काम में उनकी मदद करते हैं।
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दो साल पहले कोरोना महामारी काल में सोनू के हाथ से नौकरी चली गई। काफी समय तक वह खाली बैठे थे। एक दिन कॉलोनी में चाय की दुकान पर बैठे थे। वहां उनके एक परिचित का बच्चा मिल गया, जिससे बातचीत से पता चला कि वह 10वीं में पढ़ता है। बातों ही बातों में सोनू ने उसे अखबार पढ़ने के लिए दे दिया, तो वह बच्चा अखबार ऐसे पढ़ रहा था, जैसे नर्सरी, केजी का छात्र हो। वह हिंदी को भी ठीक से नहीं पढ़ सकता था। इससे सोनू बहुत हैरान थे।
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उन्होंने बच्चे से जानना चाहा कि उसे पढ़ना क्यों नहीं आ रहा। इसके बाद बच्चे ने जो जवाब दिया, उससे उनका दिमाग चकरा गया। बच्चे ने कहा, स्कूल में पढ़ाई नहीं होती। इसके बाद सोनू ने कॉलोनी के कई और बच्चों की पढ़ाई की हालत का पता लगाया। अमूमन, सबकी हालत ऐसी ही थी, उन्हें लिखना-पढ़ना नहीं आ रहा था।

सरकारी स्कूलों के हैं विद्यार्थी
सोनू ने बताया कि भाग्य विहार कॉलोनी में अधिकतर कमजोर तबके के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। ऐसे तमाम बच्चों को उन्होंने पिछले साल दिसंबर से नि:शुल्क ट्यूशन पढ़ाने की जिम्मा उठाया। गांव के मंदिर के पुजारी ने पढ़ाने के लिए परिसर में ही जगह दी। यहां शुरुआती दिनों में वह अकेले बच्चों को पढ़ाते थे, लेकिन बाद में बाकी साथी भी उनके साथ जुड़ गए।

बच्चों को ढूंढकर ले आना पड़ता है...
सोनू के मुताबिक, वह 40-40 बच्चों की तीन कक्षाएं चला रहे हैं। कई बच्चों को कॉपी, पेंसिल, स्टेशनरी भी उपलब्ध कराते हैं। कई बच्चे बीच-बीच में नहीं आते हैं। उन्हें ढूंढकर ले आना पड़ता है।


भूख को पीछे छोड़ पढ़ने आ रहे बच्चे
उनकी कक्षा में एक ही घर के छह-सात बच्चे आते हैं। वह कई दिन से नहीं आ रहे थे। सोनू ने जब उनके घर जाकर देखा तो पता चला उनके घर में दो दिन से खाना ही नहीं बना, इसलिए बच्चे पढ़ने नहीं आ रहे थे।

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