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Delhi News: दुष्कर्म पीड़िता को मातृत्व की जिम्मेदारी थोपना गरिमा से जीने के अधिकार का हनन

Tue, 15 Sep 2026 08:53 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2026 08:53 PM IST
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Imposing the responsibility of motherhood on a rape survivor violates the right to live with dignity.
दुष्कर्म पीड़िता को मातृत्व की जिम्मेदारी थोपना गरिमा से जीने के अधिकार का हनन
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न्यायालय ने यह टिप्पणी 15 वर्षीय पीड़िता की याचिका स्वीकार करते हुए की
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि दुष्कर्म पीड़िता को अपराध से उत्पन्न गर्भधारण जारी रखने के लिए मजबूर करना और उसकी इच्छा के विरुद्ध मातृत्व की जिम्मेदारी थोपना उसके गरिमा के साथ जीने के अधिकार का गंभीर हनन है। न्यायालय ने यह टिप्पणी 15 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की याचिका स्वीकार करते हुए की, जिसमें उसने 30 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था की समाप्ति की अनुमति मांगी थी।

न्यायमूर्ति मधु जैन ने 8 सितंबर के आदेश में कहा, न्यायालय ने कहा कि महिला के अपने शरीर से संबंधित अधिकार में यह भी शामिल है कि वह मां बनना चाहती है या नहीं। न्यायमूर्ति जैन ने कहा कि गर्भावस्था की उन्नत अवस्था में चिकित्सकीय सावधानी जरूरी है, लेकिन इससे अल्पवयस्क के शारीरिक स्वायत्तता, गरिमा और प्रजनन संबंधी अधिकारों पर विचार करने से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, कोई भी चिकित्सकीय प्रक्रिया उसकी शारीरिक फिटनेस और चिकित्सकीय व्यवहार्यता के आकलन तथा सभी आवश्यक सुरक्षा उपायों के अधीन होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 या 32 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते समय अदालत को अल्पवयस्क भावी मां के सर्वोत्तम हित और कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए, साथ ही मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम के वैधानिक ढांचे पर भी विचार करना चाहिए।
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अनाथ किशोरी पर आ चुकी बहुत परेशानी

न्यायमूर्ति ने कहा कि याचिकाकर्ता मात्र 15 वर्ष की बच्ची है, जो पहले ही जघन्य यौन उत्पीड़न की पीड़ा झेल चुकी है और दोनों माता-पिता को भी खो चुकी है। जिस उम्र में बच्चे को सुरक्षा, पालन-पोषण और गरिमा के साथ बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए, उसे ऐसे हालात का सामना करना पड़ रहा है, जिनका सामना किसी बच्चे को कभी नहीं करना चाहिए। न्यायालय ने कहा, 15 वर्ष की बच्ची को यौन हिंसा के परिणामस्वरूप गर्भवती होने के कारण ‘मां’ कहकर संबोधित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और एसके अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को निर्देश दिया कि वे लड़की की गर्भावस्था समाप्ति की व्यवस्था जल्द से जल्द करें और प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखें। डॉक्टरों से कहा गया कि डीएनए पहचान और आपराधिक मामले के लिए ऊतक या भ्रूण सामग्री सुरक्षित रखें।
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