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टिकरी बॉर्डर: सात एकड़ में फैले वाटर प्रूफ हाइटेक टेंट में अब आराम से रहेंगे किसान
Sat, 09 Jan 2021 11:01 PM IST
प्राची प्रियम
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 09 Jan 2021 11:01 PM IST
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किसानों के लिए बनाया जा रहा टेंट
- फोटो : अमर उजाला
टिकरी बॉर्डर पर किसानों के लिए अब तक का सबसे बड़ा राहत कार्य किया जा रहा है। यहां सात एकड़ क्षेत्रफल में लगभग 1200 लोगों के लिए एक साथ रहने की व्यवस्था की जा रही है। खालसा एड की ओर से यहां पर किसानों के लिए विशालकाय विश्राम घर बनाया जा रहा है।
इसके निर्माण का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस वाटर प्रूफ हाइटेक विश्राम घर में सीसीटीवी कैमरे, पीने व नहाने के लिए अलग-अलग पर्याप्त साफ पानी, पुरुषों और महिलाओं के रहने की अलग-अलग व्यवस्था व 50 बायोटॉयलेट और 50 स्नानागार बनाए जा रहे हैं।
लगातार जारी बरसात और कड़ाके की इस ठंड में आंदोलनकारी किसानों के लिए यह अबतक की सबसे बड़ी सौगत है। खालसा एड के दिल्ली टीम कॉर्डिनेटर कुलवीर सिंह ने बताया कि सिंघू बॉर्डर पर लगभग 600 लोगों के रहने के लिये एक बड़ा हाइड्रेलिक सेंट्रल पोर्टा केविन टेंट लगाया जा चुका है।
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लेकिन टिकरी बॉर्डर पर बनाया जा रहा यह टेंट सबसे बड़ा है। इस अकेले टेंट का क्षेत्रफल ही 200 गुन 80 वर्ग फुट का है। लकड़ी की मजबूत प्लाई के उपयोग से जमीन से लगभग एक फुट ऊपर टेंट की फर्स बनाई गई है। ताकि जमीन की ठंड़क किसानों को न लगे।
उन्होंने बताया कि टेंट लगाने के लिए सात एकड़ जगह स्थानीय लोगों ने सेवाभाव में दी है। यह जगह बहादुरगढ़ बाइपास के पास सेक्टर-9 में बिल्कुल रोड के किनारे है।
पहले दिन से लगातार जारी है किसानों की सेवा
खालसा एड किसान आंदोलन के पहले दिन से लंगर सेवा दे रहा है। कुलविंदर सिंह ने बताया कि लंगर सेवा देने वालों की संख्या बढ़ने लगी तो उन्होंने किसानों की जरूरत की वस्तुएं देने का निर्णय लिया।
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इसके निर्माण का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस वाटर प्रूफ हाइटेक विश्राम घर में सीसीटीवी कैमरे, पीने व नहाने के लिए अलग-अलग पर्याप्त साफ पानी, पुरुषों और महिलाओं के रहने की अलग-अलग व्यवस्था व 50 बायोटॉयलेट और 50 स्नानागार बनाए जा रहे हैं।
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लगातार जारी बरसात और कड़ाके की इस ठंड में आंदोलनकारी किसानों के लिए यह अबतक की सबसे बड़ी सौगत है। खालसा एड के दिल्ली टीम कॉर्डिनेटर कुलवीर सिंह ने बताया कि सिंघू बॉर्डर पर लगभग 600 लोगों के रहने के लिये एक बड़ा हाइड्रेलिक सेंट्रल पोर्टा केविन टेंट लगाया जा चुका है।
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लेकिन टिकरी बॉर्डर पर बनाया जा रहा यह टेंट सबसे बड़ा है। इस अकेले टेंट का क्षेत्रफल ही 200 गुन 80 वर्ग फुट का है। लकड़ी की मजबूत प्लाई के उपयोग से जमीन से लगभग एक फुट ऊपर टेंट की फर्स बनाई गई है। ताकि जमीन की ठंड़क किसानों को न लगे।
उन्होंने बताया कि टेंट लगाने के लिए सात एकड़ जगह स्थानीय लोगों ने सेवाभाव में दी है। यह जगह बहादुरगढ़ बाइपास के पास सेक्टर-9 में बिल्कुल रोड के किनारे है।
पहले दिन से लगातार जारी है किसानों की सेवा
खालसा एड किसान आंदोलन के पहले दिन से लंगर सेवा दे रहा है। कुलविंदर सिंह ने बताया कि लंगर सेवा देने वालों की संख्या बढ़ने लगी तो उन्होंने किसानों की जरूरत की वस्तुएं देने का निर्णय लिया।
खासला एड ने किसानों को गर्म कपड़े बांटे, स्नानागार बनवाए, गीजर बांटे, साबुन उपलब्ध कराए, कूड़ेदान दिया, किसान मॉल खोला, कपड़े धोने के लिये वशिंग मशीन लगाई और अब सबसे बड़ा विश्राम घर बना रहे हैं। दानदाताओं के सहयोग और कार्यकर्ताओं की मेहनत से ऐसा संभव हो पाया है।
सरकार को माननी चाहिए किसानों की बात
कुलविंदर सिंह का मानना है कि किसानों की बातें सरकार को जल्द से जल्द मान लेनी चाहिये। तीनों कृषि कानूनों से किसानों को भारी नुकसान होगा। इसीलिये वह पीछे हटने को राजी नहीं हैं। खालसा एड किसानों के इस संघर्ष में अंतिम तक उनके साथ है।
सरकार को माननी चाहिए किसानों की बात
कुलविंदर सिंह का मानना है कि किसानों की बातें सरकार को जल्द से जल्द मान लेनी चाहिये। तीनों कृषि कानूनों से किसानों को भारी नुकसान होगा। इसीलिये वह पीछे हटने को राजी नहीं हैं। खालसा एड किसानों के इस संघर्ष में अंतिम तक उनके साथ है।