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Delhi News: हिंदुत्व राष्ट्रवादी चिंतन है, आज अधिक आवश्यकता- नितिन गडकरी

Wed, 25 Jun 2025 09:40 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 25 Jun 2025 09:40 PM IST
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Hindutva is a nationalist thought, more needed today- Nitin Gadkari
---केंद्रीय मंत्री ने कहा, हिंदुत्व से युवाओं को चार्ज करना है तो पुराने इतिहास से उनका परिचय कराना होगा
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---आईजीएनसीए में मराठा वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस किताब का किया विमोचन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, हिंदुत्व राष्ट्रवादी चिंतन है, आज इसकी बहुत अधिक आवश्यकता है, शिवाजी के हिंदवी विचार समाज के लिए चार्जर की तरह हैं। हिंदुत्व से युवाओं को चार्ज करना है तो हमें अपने पुराने इतिहास से युवाओं का परिचय कराना होगा। आईजीएनसीए में किताब मराठा वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस के विमोचन के मौके पर वह बोल रहे थे।
इस किताब को आभास वर्मा ने लिखा है, गरुण प्रकाशन ने इसे प्रकाशित किया है। जो भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण, लेकिन उपेक्षित अध्याय को उजागर करती है। इसमें छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान के बाद मुगलों के खिलाफ मराठा प्रतिरोध का वर्णन है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, अग्रेजों के लिखे गए हमारे इतिहास में विकृतियां हैं, उसमें सुधार की जरूरत है। आभास वर्मा जैसे युवा लेखक पुराने इतिहास का संकलन कर रहे हैं। इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। उन्होंने कहा, और भी लेखकों को हमारे पुराने असली इतिहास को संकलित करने के लिए आगे आना होगा। हमें सोशल मीडिया, प्रिंट, टीवी मीडिया के माध्यम से अपने पुराने इतिहास के विषय में बताना चाहिए। ये इतिहास भविष्य निर्माण के लिए बहुत आवश्यक है। हमारे वीर शिरोमणि शिवाजी महाराज के हिंदवी विचार सदैव प्रवाहित होते रहना चाहिए। लेखक और इतिहासकार उदय माहूरकर ने कहा, मराठाओं ने करीब 50 साल तक दिल्ली के मुगल सिंहासन को नियंत्रित किया। यह किताब भारत के दो महान योद्धाओं, संताजी घोरपड़े और धनाजी जाधव को भी जीवंत करती है, जिन्होंने अपने पराक्रम से मुगलों को झकझोर दिया और औरंगजेब को भी भयभीत किया, लेकिन जिनके नाम आज के भारत को ज्ञात नहीं हैं। पद्मश्री प्रो. भरत गुप्त, ऑर्गनाइजर साप्ताहिक के संपादक प्रफुल्ल केतकर, गरुड़ प्रकाशन के संस्थापक संक्रांत सानू समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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किताब मराठा प्रतिरोध का विवरण - आभास वर्मा
आभास वर्मा ने बताया, उनकी किताब 1689 से 1707 के बीच मराठा प्रतिरोध का विवरण पेश करती है। यह राजाराम भोंसले के जिंजी किले तक के पलायन, किले की रक्षा और संताजी और धनाजी द्वारा चलाए गए छापामार अभियानों को वर्णित करती है। साथ ही इसमें प्रशासनिक रणनीतियों, नागरिक नेतृत्व और नायक और बेरड़ जैसे स्थानीय समूहों के योगदान को भी रेखांकित किया गया है।
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