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दिल्ली: पुलिस आयुक्त अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती मामले में सीपीआईएल ने दायर की हस्तक्षेप याचिका, बुधवार को होगी सुनवाई
Tue, 31 Aug 2021 05:32 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Tue, 31 Aug 2021 05:32 PM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पहले सद्रे आलम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने हस्तक्षेप आवेदन दायर कर उनका पक्ष सुनने का आग्रह किया।
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राकेश अस्थाना, दिल्ली पुलिस आयुक्त
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती मामले में गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर दी। याची के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आवेदन दायर कर कहा कि हाईकोर्ट में पहले से दायर याचिका उनके द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका की प्रत्यक्ष रूप से कॉपी पेस्ट है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि न तो याची न ही केंद्र सरकार के वकील ने अदालत के ध्यान में यह तथ्य रखा। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में याची सीपीआईएल को इस मुद्दे को हाईकोर्ट के समक्ष रखने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया था।
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हस्तक्षेप आवेदन दायर कर पक्ष सुनने का किया आग्रह
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पहले सद्रे आलम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने हस्तक्षेप आवेदन दायर कर उनका पक्ष सुनने का आग्रह किया। उन्होंने पीठ को बताया कि वर्तमान याचिका सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सीपीआईएल द्वारा दायर याचिका के एक-एक शब्द समान है। पीठ ने उनके द्वारा पेश आवेदन पर गौर करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह सरासर कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। भूषण ने कहा कि न तो याचिकाकर्ता और न ही सरकार के वकील ने अदालत को सही स्थिति की जानकारी दी।
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नहीं लगाने चाहिए ऐसे आरोप
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि उन्हें इस तथ्य की जानकारी नहीं है। उनके इस तर्क को खारिज करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि वे केंद्र सरकार के खिलाफ एक खास आरोप लगा रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए और उन्हें हमारी याचिका की जानकारी थी। वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि दोनों का मुद्दा एक ही आधार पर है, ऐसे आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।
आदेश को दी गई थी चुनौती
पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बुधवार यानी एक सितंबर को दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने का निर्णय किया है। उच्चतम न्यायालय के समक्ष सीपीआईएल द्वारा दायर याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अस्थाना की नियुक्ति, सेवा विस्तार और उन्हें रिटायर होने के ठीक चार दिन पहले दिल्ली के पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
मापदंड को नजरअंदाज कर दिया गया
याची ने तर्क तर्क दिया कि यह निर्णय प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्पष्ट रूप से उल्लंघन है। उन्होंने कहा अस्थाना का अपेक्षित न्यूनतम कार्यकाल छह महीने नहीं था, इसलिए उनकी नियुक्ति के लिए यूपीएससी का कोई पैनल नहीं बनाया गया और फैसले में दिए गए निर्देशानुसार न्यूनतम दो वर्ष के कार्यकाल के मापदंड को नजरअंदाज कर दिया गया।
याचिका में यह भी तर्क रखा गया कि मई 2021 में हुई एक उच्चस्तरीय समिति की बैठक में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे। केंद्र सरकार ने अस्थाना को सीबीआई निदेशक के रूप में नियुक्त करने का प्रयास किया था, लेकिन इस प्रस्ताव को कथित तौर पर सीजेआई एनवी रमण ने प्रकाश सिंह मामले में निर्धारित छह महीने के नियम का हवाला देते हुए खारिज कर दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने 25 अगस्त को इस याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट को दो सप्ताह में इस मुद्दे पर निर्णय देने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश रमणा ने इस याचिका से स्वयं को इस आधार पर अलग कर लिया था कि वे सीबीआई निदेशक की नियुक्ति मामले में समिति के सदस्य थे।