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कोराना के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद भी क्यों नहीं टूटी नींद

Fri, 20 Nov 2020 02:29 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 20 Nov 2020 02:29 AM IST
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High court slams Delhi govt
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि राजधानी में कोरोना संक्रमण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद भी आपकी नींद क्यों नहीं टूटी। कोविड-19 संक्रमण के प्रसार पर रोक लगाने के लिए शादियों में लोगों की संख्या को 200 से घटाकर 50 करने में 18 दिनों का क्यों इंतजार किया। अदालत के हस्तक्षेप से पहले इस पर निर्णय क्यों नहीं लिया। पीठ ने दिल्ली सरकार से 26 नवंबर को इस मामले की अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इसमें कोरोना से मृतकों के अंतिम संस्कार और शवों को दफनाने की व्यवस्था के अलावा अस्पतालों में आईसीयू बेड की संख्या में बढ़ोतरी संबंधी रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
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जस्टिस हेमा कोहली और सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने राकेश मल्होत्रा की ओर से कोविड-19 के लिए जांच में बढ़ोतरी और शीघ्र रिपोर्ट देने के संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि जब राजधानी में कोरोना संक्रमण के अत्यधिक मामले सामने आ रहे थे, प्रशासन ने इसे नियंत्रित करने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया। क्या दिल्ली सरकार उन परिवारों को समझा सकती है, जिन्होंने पिछले 18 दिनों के दौरान कोरोना की वजह से अपने परिजनों को खो दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि संक्रमण की स्थिति गंभीर होने के बाद भी आखिरकार दिल्ली सरकार की निगाहें हालात को काबू करने की तरफ क्यों नहीं गईं। अदालत ने कहा कि कोरोना की वजह से एक दिन में अधिकतम 131 लोगों की मौत और 8 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं, फिर भी सरकार की ओर से देरी क्यों हुई?
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रोकथाम के कदम तत्काल क्यों नहीं उठाए
हाईकोर्ट ने कहा, एक नवंबर से हवा के बदलते रुख को देखने के बाद भी सरकार कछुए की चाल में चलती रही। जब संक्रमितों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई तो तत्काल इसकी रोकथाम के लिए कदम क्यों नहीं उठाए। अदालत को क्यों 11 नवंबर को इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सरकार को नींद से जगाना पड़ा। एक से 11 नवंबर तक सरकार क्या कर रही थी, क्यों नहीं कोई फैसला लिया। क्या सरकार को इस बात का अंदाजा नहीं कि इस दौरान कितनी मौतें हुईं।
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प्रेस और अदालत में दिए बयान अलग-अलग
पीठ ने नोट किया कि दिल्ली सरकार की ओर से कोविड मामलों पर प्रेस और अदालत में दिए गए बयान अलग-अलग प्रतीत होते हैं। सरकार के मंत्री की ओर से प्रेस में बयान दिया गया कि कोविड संक्रमण की तीसरी लहर चरम पर पहुंच गई है, लेकिन संक्रमितों की संख्या घट रही है, लेकिन दैनिक आंकड़े और अदालत में पेश की गई रिपोर्ट में अंतर है। पीठ ने कहा कि श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए चिताएं रात भर जलती रहती हैं। दिल्ली सरकार से यह भी सवाल पूछा कि कोविड-19 के मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम हैं?
आरटीपीसीआर टेस्ट पर ध्यान केंद्रित करें
पीठ ने कहा कि रैपिड एंटीजन परीक्षण (आरएटी) पर निर्भरता कम कर आरटीपीआरसी टेस्ट की तरफ ध्यान केंद्रित करना चाहिए। क्योंकि बगैर लक्षण वाले मामले अधिक आ रहे हैं, जिससे कोविड संक्रमण की रफ्तार और तेज हुई है। दिल्ली सरकार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रैपिड एंटीजन टेस्ट अधिक प्रभावी नहीं है।
न्यूयार्क को भी दिल्ली ने पछाड़ा, निगरानी में कमी
पीठ ने मानकों के पालन के लिए मार्शल की ओर से की जा रही निगरानी को नाकाफी बताते हुए कहा कि मौजूदा हालात को गंभीरता से देखते हुए जिम्मेवारी निभाएं। दिल्ली ने न्यूयॉर्क और साओ पाउलो जैसे शहरों को भी कोरोना संक्रमण में पछाड़ दिया है।
ढील दिए जाने पर भी सरकार की हुई थी खिंचाई
11 नवंबर को अदालत ने सार्वजनिक सभाएं और विरोध प्रदर्शन के लिए तय मानदंडों में ढील दिए जाने पर दिल्ली सरकार की खिंचाई की थी। क्योंकि बगैर लक्षण वाले संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे थे। अदालत ने यह पूछा था कि क्या इस खतरनाक स्थिति से लड़ने के लिए कोई रणनीति है।
क्या-क्या कहा
-सामाजिक सुरक्षा मानदंडों को लागू करने के लिए दिल्ली सरकार के कुछ जिलों में प्रशासन की ओर से की जा रही निगरानी संतोषजनक नहीं थी। खासकर उन इलाकों में जहां कोविड के मामले बढ़ रहे थे।
-सार्वजनिक जगहों पर थूकने, मास्क सहित मानकों का पालन न करने वालों पर सख्ती नहीं की गई। पहली बार उल्लंघन करने पर 500 रुपये जबकि इसके बाद प्रत्येक बार 1000 रुपये का जुर्माना लागू करने में भी ढिलाई और असमानता बरती गई।

सरकार ने बचाव में यह दी दलील
अदालत ने पिछली सुनवाई में कोविड-19 मामलों में खतरनाक रूप से हो रही बढ़ोतरी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। अपनी रिपोर्ट में दिल्ली सरकार ने कहा है कि वह सभी गतिविधियों की अनुमति नहीं दे रही है। स्कूलों और उच्च शैक्षणिक संस्थानो व स्विमिंग पूल को अब तक नहीं खोला गया, जबकि केंद्र सरकार इनकी अनुमति दे चुकी है। वायु प्रदूषण में वृद्धि और लोगों की भीड़ को रोकने के लिए दिवाली पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा मनाने पर भी रोक लगा दी। केंद्र से राजधानी के कुछ बाजारों को सप्ताह में कुछ दिनों या घंटों के लिए बंद रखने की मंजूरी मांगी गई है। कोविड प्रसार को रोकने के लिए सरकार की ओर से हरसंभव प्रयास किए जा रहे थे। पीठ ने इन्हें नाकाफी बताते हुए अगली सुनवाई पर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने को कहा।
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