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जामिया वीसी की नियुक्ति को चुनौती याचिका पर जवाब तलब

Thu, 05 Aug 2021 12:27 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 05 Aug 2021 12:27 AM IST
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high court seeks response over appointment of Jamia VC
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की कुलपति (वीसी) डॉ. नजमा अख्तर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र, नजमा अख्तर, केंद्रीय सतर्कता आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और जामिया मिल्लिया इस्लामिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह के समक्ष पांच मार्च को सिंगल जज द्वारा दिए आदेश के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही है। उन्होंने चुनौती याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि नियुक्ति में कोई उल्लंघन नहीं हुआ।
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पीठ ने केंद्र, नजमा अख्तर, केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और जामिया मिल्लिया इस्लामिया को अपना पक्ष 22 सितंबर तक दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने केंद्रीय सतर्कता आयोग को नियुक्ति के संबंध में मूल दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है।
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विश्वविद्यालय के विधि संकाय के पूर्व छात्र एम. एहतेशाम-उल-हक द्वारा दायर अपील में कहा गया है कि सिंगल जज इस बात को समझने में विफल रहे कि सर्च कमेटी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया उचित नहीं थी। उन्होंने कहा कि सीवीसी ने अख्तर की नियुक्ति के संबंध में विपरीत रिपोर्ट दी थी और समिति को उस पर विचार करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
पीठ ने उनके इस तर्क पर कहा कि वे इस मुद्दे से संबंधित सीवीसी के मूल रिकॉर्ड को देखना चाहेंगे कि इसके ध्यान में लाए गए नए तथ्य क्या हैं।
याची ने कहा सर्च कमेटी को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठता के व्यक्तियों को शामिल करना था। कमेटी के सदस्यों में से एक न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एमएसए सिद्दीकी उपयुक्त नहीं थे। याची ने कहा कि अकादमिक प्रश्न जिसे शिक्षाविदों द्वारा तय किया जाना चाहिए, क्योंकि वे इस तरह के मामलों को देखने के लिए बेहतर तरीके से निर्णय लेने के लिए उपयुक्त हैं। इसके लिए विशेषज्ञता और अनुभव चाहिए, जो न्यायाधीशों के पास नहीं हो सकता।

वहीं केंद्र और जामिया की ओर से पेश एएसजी विक्रमजीत बनर्जी ने तर्क रखा कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सिद्दीकी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के अध्यक्ष होने के अपने पिछले अनुभव के कारण चयन कमेटी का हिस्सा बनने के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कमेटी को उपयुक्त नामों वाले पैनल की सिफारिश करने के लिए कारण बताने की आवश्यकता नहीं है।
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