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हाईकोर्ट ने विदेशी तबलीगी जमातियों की याचिकाओं पर केन्द्र से मांगा जवाब
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने तब्लीगी जमात में शामिल होने के संबंध में दर्ज रिपोर्ट खारिज करने के अनुरोध वाली दो याचिकाओं पर केन्द्र सरकार और पुलिस से जवाब मांगा है। ये याचिकाएं 24 देशों के नागरिकों की ओर से दायर की गई हैं। इन विदेशी नागरिकों पर अवैध रूप से तब्लीगी जमात में शामिल होने, वीजा नियमों तथा कोविड-19 संबंधी सरकारी दिशा निर्देशों के उल्लंघन का आरोप है।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे मामले की अगली तारीख 10 अगस्त से पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें। इन विदेशियों की ओर से वकील रेबेका जॉन ने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी में वे पहले ही अपना जुर्म कुबूल कर चुके हैं और उन्होंने समझौता याचिका के प्रावधानों के अंतर्गत कम सजा की गुहार लगाई है।
वकील ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण लागू लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के मामूली अपराध को स्वीकार करने और जुर्माने का भुगतान करने के बाद आरोपियों को निचली अदालत ने मुक्त करने की अनुमति दी थी। सीलमपुर पुलिस थाने में दर्ज अन्य मामलों के कारण वे वापस अपने देश लौटने में असमर्थ हैं। उन्होंने दलील दी कि पुलिस एक ही अपराध के लिए दो प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकती।
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न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे मामले की अगली तारीख 10 अगस्त से पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें। इन विदेशियों की ओर से वकील रेबेका जॉन ने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी में वे पहले ही अपना जुर्म कुबूल कर चुके हैं और उन्होंने समझौता याचिका के प्रावधानों के अंतर्गत कम सजा की गुहार लगाई है।
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वकील ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण लागू लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के मामूली अपराध को स्वीकार करने और जुर्माने का भुगतान करने के बाद आरोपियों को निचली अदालत ने मुक्त करने की अनुमति दी थी। सीलमपुर पुलिस थाने में दर्ज अन्य मामलों के कारण वे वापस अपने देश लौटने में असमर्थ हैं। उन्होंने दलील दी कि पुलिस एक ही अपराध के लिए दो प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकती।
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