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उच्च न्यायालय ने रामपुर जिला अस्पताल से मांगा जवाब

Sat, 29 Jan 2022 01:06 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 01:06 AM IST
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High Court seeks reply from Rampur District Hospital
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला अस्पताल से जवाब मांगा। पिछले साल गणतंत्र दिवस पर विरोध रैली के दौरान ट्रैक्टर पलटने से 25 वर्षीय किसान की मौत हो गई थी। उसका पोस्टमार्टम यूपी के रामपुर के जिला अस्पताल में किया गया था। मृतक के दादा ने दायर याचिका में एक्स-रे प्लेट में स्पष्ट विसंगति होने का आरोप लगाया है।
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न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने मृतक के दादा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत की निगरानी में मामले की एसआईटी जांच की मांग की थी। इस मामले मामले की अगली सुनवाई के लिए अगली तारीख 11 मई तय की गई है। वकील वृंदा ग्रोवर और सौतिक बनर्जी की ओर से प्रतिनिधित्व किए गए याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एक्स-रे प्लेट सामान्य अभ्यास के अनुसार तैयार नहीं की गई है, जिससे संदेह पैदा होता है। एक्स-रे रिपोर्ट में विसंगति इसलिए नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि मृतक को आग्नेयास्त्र की चोट का सामना करना पड़ा या कोई दूसरी वजह थी। एक्स-रे प्लेट न केवल गोली सरीखे किसी टुकड़े की मौजूदगी बता रही है, बल्कि अंतर्दृष्टि भी प्रदान कर सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं है कि क्या पोस्टमार्टम से पहले एक्स-रे किया गया। इसमें मौत के कारण के संबंध में अपनी राय देने से पहले डॉक्टर ने इसका कोई संदर्भ नहीं दिया था ।एक्स-रे प्लेट पर मृतक का नाम हाथ से लिखने से संदेह पैदा होता है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि दिल्ली पुलिस ने विसंगतियों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की
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याचिका में मृतक नवरीत सिंह के दादा हरदीप सिंह ने दावा किया है कि पीड़ित के सिर में गोली लगी है। शव का पोस्टमार्टम उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला अस्पताल में किया गया। हालांकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस दोनों ने कहा है कि नवरीत सिंह को गोली लगने का कोई घाव नहीं हुआ। दिल्ली पुलिस ने पहले दीनदयाल उपाध्याय मार्ग साइट पर स्थित सीसीटीवी कैमरों से एकत्र किए गए फुटेज के आधार पर कहा कि तेज रफ्तार ट्रैक्टर बेरिकेड से टकराने के बाद पलट गया। फुटेज से यह भी पता चलता है कि पुलिस कर्मी तेज रफ्तार ट्रैक्टर से सुरक्षा के लिए भाग रहे थे। उनमें से किसी ने वाहन या चालक पर गोली नहीं चलाई। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा था कि सीसीटीवी फुटेज से संकेत मिलता है कि प्रदर्शनकारी घायल नवरीत सिंह को किसी नजदीकी अस्पताल में नहीं ले गए, बल्कि दुर्घटना की खबर सुनकर मौके पर पहुंची एंबुलेंस पर हमला कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने शव को पांच घंटे तक सड़क पर रखा और फिर अफवाह फैला दी कि वह पुलिस फायरिंग में मारा गया है।
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