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वेतन मामला: हाईकोर्ट सख्त, कहा-उत्तरी निगम आयुक्त के खिलाफ क्यों न की जाए अवमानना कार्रवाई
Wed, 28 Apr 2021 11:10 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 28 Apr 2021 11:10 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने डॉक्टरों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं देने पर उत्तरी निगम के प्रति नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि क्यों न निगम आयुक्त के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए और निगम की संपत्ति जब्त की जाए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हाईकोर्ट ने डॉक्टरों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं देने पर उत्तरी निगम के प्रति नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि क्यों न निगम आयुक्त के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए और निगम की संपत्ति जब्त की जाए।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ के समक्ष उत्तरी निगम ने कर्मचारियों को अब तक का वेतन प्रदान करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। अदालत ने उनके तर्क पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हमने बार-बार आपको सभी कर्मचारियों का वेतन समय पर देने का निर्देश दिया है।
बावजूद इसके आदेश का पालन नहीं हो रहा। अदालत ने निगम के अधिवक्ता से पूछा कि अब आप ही बताएं कि क्या कार्रवाई की जाए। क्यों न निगम आयुक्त के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए और संपत्ति जब्त की जाए।
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इससे पूर्व निगम के अधिवक्ता दिव्य प्रकाश पांडे ने तर्क रखा कि डॉक्टर, नर्स व मेडिकल स्टाफ का फरवरी माह तक का वेतन जारी कर दिया गया है, जबकि शिक्षकों व ग्रुप ए कर्मचारियों का जनवरी तक का भुगतान किया गया है।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ के समक्ष उत्तरी निगम ने कर्मचारियों को अब तक का वेतन प्रदान करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। अदालत ने उनके तर्क पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हमने बार-बार आपको सभी कर्मचारियों का वेतन समय पर देने का निर्देश दिया है।
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बावजूद इसके आदेश का पालन नहीं हो रहा। अदालत ने निगम के अधिवक्ता से पूछा कि अब आप ही बताएं कि क्या कार्रवाई की जाए। क्यों न निगम आयुक्त के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए और संपत्ति जब्त की जाए।
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इससे पूर्व निगम के अधिवक्ता दिव्य प्रकाश पांडे ने तर्क रखा कि डॉक्टर, नर्स व मेडिकल स्टाफ का फरवरी माह तक का वेतन जारी कर दिया गया है, जबकि शिक्षकों व ग्रुप ए कर्मचारियों का जनवरी तक का भुगतान किया गया है।
अदालत ने कहा कि पूरा वेतन क्यों नहीं दिया गया तो उन्होंने कहा कि हम बहाना नहीं बना रहे हैं, लेकिन अचानक कोरोना की दूसरी लहर के कारण हमें पर्याप्त अनुदान नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में दिल्ली सरकार को पत्र लिखा गया है, लेकिन कोरोना महामारी के कारण सरकार भी वित्तीय संकट में है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को वेतन भुगतान के लिए बकाया 250 करोड़ रुपये देने की मांग को लेकर एक आवेदन दाखिल किया गया है।
कोर्ट ने कहा कि आवेदन रिकार्ड पर नहीं है। पीठ ने आवेदन को रिकार्ड पर लेने का निर्देश देते हुए सुनवाई 31 मई तक स्थगित कर दी। वहीं दिल्ली सरकार के अधिवक्ता संदीप सेठी ने कहा कि वेतन का भुगतान करने के लिए नगर निगम अग्रिम भुगतान की मांग नहीं कर सकता है। वहीं पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने कहा कि उन्होंने सभी कर्मचारियों का मार्च तक के वेतन एवं पेंशन का भुगतान कर दिया है।
कोर्ट ने सभी नगर निगमों को पांच अप्रैल तक कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने वेतन भुगतान के लिए और समय देने की निगमों की मांग को ठुकरा दिया था। अदालत सफाई कर्मचारियों सहित अन्य कर्मचारियों के रूके वेतन को जारी करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में दिल्ली सरकार को पत्र लिखा गया है, लेकिन कोरोना महामारी के कारण सरकार भी वित्तीय संकट में है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को वेतन भुगतान के लिए बकाया 250 करोड़ रुपये देने की मांग को लेकर एक आवेदन दाखिल किया गया है।
कोर्ट ने कहा कि आवेदन रिकार्ड पर नहीं है। पीठ ने आवेदन को रिकार्ड पर लेने का निर्देश देते हुए सुनवाई 31 मई तक स्थगित कर दी। वहीं दिल्ली सरकार के अधिवक्ता संदीप सेठी ने कहा कि वेतन का भुगतान करने के लिए नगर निगम अग्रिम भुगतान की मांग नहीं कर सकता है। वहीं पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने कहा कि उन्होंने सभी कर्मचारियों का मार्च तक के वेतन एवं पेंशन का भुगतान कर दिया है।
कोर्ट ने सभी नगर निगमों को पांच अप्रैल तक कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने वेतन भुगतान के लिए और समय देने की निगमों की मांग को ठुकरा दिया था। अदालत सफाई कर्मचारियों सहित अन्य कर्मचारियों के रूके वेतन को जारी करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।