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हाईकोर्ट ने कहा : लड़की के परिजनों के कहने पर लड़के के खिलाफ पॉक्सो लगाना दुर्भाग्यपूर्ण

Fri, 15 Oct 2021 04:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 15 Oct 2021 04:13 AM IST
सार

अदालत ने कहा यह एक घिसी-पिटी और दुर्भाग्यपूर्ण प्रथा बन गई है कि पुलिस लड़की के परिवार के इशारे पर पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर रही है।

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High Court said: Unfortunate to impose POCSO against the boy at the behest of the girl's family
demo pic... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्च न्यायालय ने लड़की के परिजनों के कहने पर लड़के पर पॉक्सो की धाराएं लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे गलत तरीके से लागू किया जा रहा है। अदालत ने दुष्कर्म के आरोपी को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा वह आरोपी और पीड़िता के बीच दोस्ती को नजरअंदाज नहीं कर सकती और यह जोड़ा प्रतीत होता है।

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न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा तथ्यों से स्पष्ट है कि लड़की के परिवार के आग्रह पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी जो यह जानने पर शर्मिंदा थे कि वह गर्भवती है और इससे पड़ोस में सामाजिक प्रतिक्रिया होगी। अदालत ने कहा सहमति से सेक्स कानून में ग्रे क्षेत्र में रहा है क्योंकि नाबालिग द्वारा दी गई सहमति को कानून की नजर में वैध सहमति नहीं कहा जा सकता। सवाल उठता है कि याचिकाकर्ता (पुरुष) को जमानत दी जानी चाहिए या नहीं। 
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अदालत ने कहा लड़की को उस आरोपी को जमानत देने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि वे दोनों कमोबेश एक ही उम्र के हैं। इस तथ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती कि आरोपी केवल 21 साल का है, उसके आगे पूरी जिंदगी है। अदालत को बताया गया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी युवक उत्तर प्रदेश के हरदोई में अपने माता-पिता के साथ रहेगा और उसके पते का सत्यापन अभियोजन पक्ष द्वारा किया गया है।
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अदालत ने आरोपी की जमानत 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार की है। अदालत ने उसे साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने व अदालती कार्यवाही में पेश होने तक हरदोई जिले को नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है।

पॉक्सो का दुरुपयोग किया जा रहा 
अदालत ने कहा यह एक घिसी-पिटी और दुर्भाग्यपूर्ण प्रथा बन गई है कि पुलिस लड़की के परिवार के इशारे पर पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर रही है जो उसकी दोस्ती और एक युवा लड़के के साथ रोमांटिक जुड़ाव पर आपत्ति जताते हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि कानून की कठोरता को गलत तरीके से लागू किया जा रहा है और बाद में इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।

अदालत ने कहा कि आरोपी और लड़की की उम्र, तस्वीरों से स्पष्ट रूप से दोनों के बीच एक रिश्ते की ओर इशारा करते हैं और मेडिकल रिपोर्ट, एफआईआर और मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयानों में विसंगतियां हैं। यह तथ्य आरोपी को जमानत देने की दिशा में झुकाव है।

गर्भावस्था समाप्त करवाने के लिए एफआईआर
अदालत ने कहा सामाजिक शर्मिंदगी से बचने और गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने के लिए यह एफआईआर दर्ज की गई है जिससे इसे यौन शोषण का रंग दिया गया है। इसे यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के दायरे में लाया गया है जिसमें बाल दुर्व्यवहार को समाप्त करने की परिकल्पना की गई है।


एफआईआर के मुताबिक, लड़की ने शिकायत की थी कि उसकी उम्र 16 साल है और वह 12वीं कक्षा की छात्रा है और पिछले साल जनवरी में यह शख्स स्कूल जाते समय उसका पीछा करता था। आरोपी ने उससे दोस्ती करने का इरादा जाहिर किया था लेकिन उसने विरोध किया। पिछले वर्ष कोविड के चलते लॉकडाउन के दौरान जब वह एक दोस्त की जगह से लौट रही थी तो उस शख्स ने उसे रोक लिया। एक घर में ले जाकर उसे कुछ स्नैक्स दिए जिसके बाद वह बेहोश हो गई व वहां आरोपी ने उससे दुष्कर्म किया। उसने अपने घर इसकी सूचना नहीं दी और उलटियां होने पर घर में उसके गर्भवती होने का पता चला। पुलिस ने शिकायत पर यह मामला दर्ज किया और परिवार के सदस्यों ने उसका गर्भपात करवा दिया।
 

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