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दिल्ली: हाईकोर्ट ने कहा- एक बार स्वीकार किया गया इस्तीफा नहीं ले सकते वापस, जामिया के प्रोफेसर ने दोबारा नौकरी का किया दावा
Tue, 26 Oct 2021 08:22 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Tue, 26 Oct 2021 08:22 PM IST
सार
याची ने कहा उन्होंने जामिया विश्वविद्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र या अतिरिक्त साधारण अवकाश (ईओएल) का अनुदान मांगा। हालांकि, अनुरोध को विश्वविद्यालय ने 20 अगस्त, 2010 को एक पत्र के माध्यम से खारिज कर दिया।
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विस्तार
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति द्वारा दिया इस्तीफा एक बार स्वीकार कर लेने के बाद इस्तीफा देने वाला व्यक्ति इसे वापस लेने की मांग नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने याचिकाकर्ता मोहरम अली खान के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उन्हें जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय द्वारा उनके इस्तीफे को स्वीकार करने के लिए जारी आदेश प्राप्त नहीं हुआ, क्योंकि ऐसा आदेश याचिकाकर्ता के अनुरोध के अनुसार जारी किया गया था।
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अदालत ने कहा किसी भी मामले में यदि असाधारण अवकाश (ईओएल) के लिए याचिकाकर्ता के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था, तो वह सऊदी अरब में कार्यभार ग्रहण करने के लिए विश्वविद्यालय नहीं छोड़ सकता था। सऊदी जाने से पहले उसे कम से कम अपने इस्तीफे के बारे में पूछताछ करनी चाहिए थी। एक बार स्वीकार किया गया इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता।
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वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (जेएमआई) में गणित के प्रोफेसर हैं, जिन्होंने साऊदी अरब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया था। याची ने कहा उन्होंने जामिया विश्वविद्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र या अतिरिक्त साधारण अवकाश (ईओएल) का अनुदान मांगा। हालांकि, अनुरोध को विश्वविद्यालय ने 20 अगस्त, 2010 को एक पत्र के माध्यम से खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने तब जामिया के कुलपति से बात की, जिन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि ईओएल के उनके अनुरोध पर अनुकूल विचार किया जाएगा।
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याची ने कहा उक्त आश्वासन पर भरोसा करते हुए उसने किंग अब्दुल अजीज विश्वविद्यालय में एक वर्ष के लिए अनुबंध पर डयूटी ज्वाइन कर ली। याची ने कहा सऊदी अरब में एक साल पूरा करने के बाद, वह 25 अगस्त, 2011 को भारत वापस आया और जामिया विश्वविद्यालय में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट किया। लेकिन विश्वविद्यालय ने फिर से डयूटी में शामिल होने के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।
जामिया ने तर्क रखा कि याचिकाकर्ता ने सऊदी अरब जाने से पहले पद से इस्तीफा दे दिया था जिसे अस्वीकार कर दिया था। इस संबंध में 21 सितंबर 2010 याची ने पत्र लिखा था, जिसमें याचिकाकर्ता ने ईओएल की मांग की थी और वैकल्पिक रूप से जामिया में प्रोफेसर के पद से इस्तीफा देने की इच्छा भी व्यक्त की थी।
उन्होंने कहा इस अनुरोध को विश्वविद्यालय ने स्वीकार कर लिया और याचिकाकर्ता के इस्तीफे के अनुरोध को स्वीकार करते हुए 29 सितंबर, 2010 को एक आदेश भी जारी किया गया था।
उन्होंने कहा याचिकाकर्ता स्वेच्छा से सऊदी अरब गया था जबकि उसे ईओएल के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था। चूंकि याचिकाकर्ता ने अपना इस्तीफा स्वयं जमा किया था, इसलिए वह पुन: नौकरी का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता ने स्वयं अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया है, जिसके अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया। ऐसे में वह पुन: अपने नौकरी का दावा नहीं कर सकता, ऐसे में याचिका खारिज की जाती है।