फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   High Court's instructions to the Central Government - 15 lakh compensation to the businessman injured in the fake cp encounter after 25 years

कनॉट प्लेस की घटना : फर्जी मुठभेड़ में घायल कारोबारी को 25 साल बाद 15 लाख मुआवजा, हाईकोर्ट का केंद्र सरकार को निर्देश

Sat, 30 Apr 2022 04:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 30 Apr 2022 04:54 AM IST
सार

साल 1997 में हुई इस फर्जी मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस ने हरियाणा के कारोबारी प्रदीप गोयल और जगजीत सिंह की हत्या कर दी थी। कारोबारियों के साथी तरुण प्रीत घायल हुए थे। अदालत ने कहा, घटना के समय तरुण की उम्र करीब 20 साल थी। पुलिस की लापरवाही से याची ने पूरी जवानी खो दी। उनके मानसिक आघात का अंदाजा आसानी से नहीं लगा सकते। आघात केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके माता-पिता, पत्नी और अब उसके बच्चे समेत उन प्रियजनों के लिए भी है, जिन्होंने याची को शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक सहारा दिया है।

विज्ञापन
High Court's instructions to the Central Government - 15 lakh compensation to the businessman injured in the fake cp encounter after 25 years
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने कनॉट प्लेस में 25 साल पहले हुई फर्जी मुठभेड़ में घायल कारोबारी तरुण प्रीत के परिवार को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार को इस अवधि के लिए आठ फीसदी ब्याज के भुगतान को भी कहा है। ब्याज के साथ यह राशि लगभग 45 लाख होने की संभावना है।

विज्ञापन


साल 1997 में हुई इस फर्जी मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस ने हरियाणा के कारोबारी प्रदीप गोयल और जगजीत सिंह की हत्या कर दी थी। कारोबारियों के साथी तरुण प्रीत घायल हुए थे। अदालत ने कहा, घटना के समय तरुण की उम्र करीब 20 साल थी। पुलिस की लापरवाही से याची ने पूरी जवानी खो दी। उनके मानसिक आघात का अंदाजा आसानी से नहीं लगा सकते। आघात केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके माता-पिता, पत्नी और अब उसके बच्चे समेत उन प्रियजनों के लिए भी है, जिन्होंने याची को शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक सहारा दिया है।
विज्ञापन


आठ सप्ताह में करें भुगतान
जगजीत व प्रदीप के परिवारों को 2011 में 15-15 लाख और तरुण को 1999 में एक लाख का तदर्थ मुआवजा मिला था। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने निर्देश दिए कि आठ सप्ताह के भीतर मुआवजे का भुगतान किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो कारोबारियों की पुलिस ने की थी हत्या
31 मार्च 1997 को तत्कालीन एसीपी सत्यवीर सिंह राठी के नेतृत्व में पुलिस ने कार सवार दो कारोबारियों का एनकाउंटर कर दिया था। पुलिस ने दावा किया, यूपी के गैंगस्टर यासीन के धोखे में कारोबारियों को गलती से मारा गया। कार में से गोली चलाई गई थी। सीबीआई जांच में साबित हो गया कि कार से कोई गोली नहीं चली थी। पुलिस ने ही कार में पिस्टल रख दी थी। यह भी साबित हो गया कि उक्त पिस्टल से गोली ही नहीं चली थी। इन सभी पुलिसकर्मियों को उम्रकैद हुई थी।

कोर्ट ने कहा 1997 में ही मिलनी चाहिए थी मदद

कनॉट प्लेस फर्जी मुठभेड़ मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता के शरीर में अभी भी छर्रे हैं, जो अपने आप में दर्दनाक है, क्योंकि इसके दुष्प्रभाव अज्ञात हो सकते हैं।

अदालत ने कहा, याचिकाकर्ता को 1997 में ही मुआवजे का भुगतान किया जाना चाहिए था।  उनके दो बच्चे हैं, जिनके लिए उन्हें शिक्षा और शादी के मामले पूरा करने की जरूरत है। तथ्य यह है कि अन्य दो दोस्तों का निधन हो गया, लेकिन याचिकाकर्ता केवल घायल हो गया, इसके परिणामस्वरूप अलग-अलग मानकों को लागू नहीं किया जा सकता है, यहां तक  कि याचिकाकर्ता के मामले में भी जो जीवित है, उसने अपने जीवन का प्रमुख हिस्सा खो दिया है।

वह एक कपड़े की दुकान में काम करता है, उसके दो बच्चे और एक परिवार है, जो समय बीत चुका है, उसकी भरपाई भी नहीं की जा सकती है। जब सरकारी तंत्र के कारण चोट लगी है और वह भी जहां पुलिस अधिकारियों को अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है तो उस पर लापरवाही और निष्क्रियता के सामान्य मामलों की तुलना में उच्च स्तर पर विचार करने की आवश्यकता है।  

एक करोड़ की थी मांग
अदालत ने कहा, तरुण प्रीत विकलांगता के कारण पिछले 25 वर्षों से सामान्य जीवन जीने में सक्षम नहीं है। 20 साल के एक युवा के लिए किसी भी तरह की अक्षमता के कारण पीड़ित होने को उचित या तुच्छ नहीं ठहराया जा सकता है। अदालत ने यह निर्णय तरुण प्रीत सिंह की मुआवजा याचिका पर दिया है। याची ने केंद्र सरकार से एक करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा था। यह याचिका दिसंबर 1998 से लंबित थी।

इन पुलिसकर्मियों को हुई थी उम्रकैद की सजा
इस मामले में एसीपी सत्यवीर सिंह राठी, इंस्पेक्टर अनिल कुमार, सब इंस्पेक्टर अशोक राणा, हवलदार शिव कुमार, तेजपाल और महावीर सिंह, सिपाही सुमेर सिंह, सुभाष चंद्र, सुनील कुमार और कोठारी राम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, यह दोषी समय-समय पर पेरोल और फरलो लेकर जेल से बाहर आते रहे थे। इन पूर्व पुलिसकर्मियों ने 16 साल तिहाड़ जेल में बिताए हैं।

इन सभी के बेहतर व्यवहार के कारण इन्हें तिहाड़ की सेमी ओपन और ओपन जेल में शिफ्ट किया गया था। मार्च 2020 में एसआरबी ने इन सभी पुलिसकर्मियों के व्यवहार को देखते हुए रिहा करने की सिफारिश की थी। इसी सिफारिश के आधार पर इन पुलिस कर्मियों को जेल से रिहा किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed