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दिल्ली दंगा: आरोपी तन्हा की जमानत अर्जी पर फैसला सुरक्षित
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा की जमानत अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया। तन्हा पर दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोप है। न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति अनूप भंभानी की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।
तन्हा ने निचली अदालत के 26 अक्तूबर 2020 के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उनको जमानत देने से इनकार कर दिया था। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपी तन्हा के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और दंगों के षड्यंत्र में अहम भूमिका निभाने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य हैं।
तन्हा की ओर से पेश अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। पुलिस ने राजनीतिक दबाव में यह मामला दर्ज किया है जबकि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है।
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उन्होंने कहा कि दंगों के मामले में अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और मामले की जांच पूरी हो चुकी है। उनका मुवक्किल मई 2020 से जेल में है। ऐसे में उनके मुवक्किल को अनिश्चितकाल तक जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं अभियोजन अधिकारी ने जमानत पर विरोध जताते हुए कहा कि पुलिस ने दंगों का षड्यंत्र रचने के लिए तन्हा सहित 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून के विरोध में लोगों को उकसाने में तन्हा की प्रमुख भूमिका रही है। इतना ही नहीं उसके सफूरा जरगर, उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य से घनिष्ट संबंध हैं। सभी राजधानी में सीएए विरोध और उसके बाद के दंगों की प्रमुख भूमिका में रहे हैं। ऐसे में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं है।
पुलिस का आरोप है कि तन्हा ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये मोबाइल सिम खरीदी व उसका प्रयोग चक्का जाम करने, दंगों का षड्यंत्र रचने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने में किया।
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तन्हा ने निचली अदालत के 26 अक्तूबर 2020 के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उनको जमानत देने से इनकार कर दिया था। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपी तन्हा के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और दंगों के षड्यंत्र में अहम भूमिका निभाने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य हैं।
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तन्हा की ओर से पेश अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। पुलिस ने राजनीतिक दबाव में यह मामला दर्ज किया है जबकि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है।
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उन्होंने कहा कि दंगों के मामले में अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और मामले की जांच पूरी हो चुकी है। उनका मुवक्किल मई 2020 से जेल में है। ऐसे में उनके मुवक्किल को अनिश्चितकाल तक जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं अभियोजन अधिकारी ने जमानत पर विरोध जताते हुए कहा कि पुलिस ने दंगों का षड्यंत्र रचने के लिए तन्हा सहित 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून के विरोध में लोगों को उकसाने में तन्हा की प्रमुख भूमिका रही है। इतना ही नहीं उसके सफूरा जरगर, उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य से घनिष्ट संबंध हैं। सभी राजधानी में सीएए विरोध और उसके बाद के दंगों की प्रमुख भूमिका में रहे हैं। ऐसे में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं है।
पुलिस का आरोप है कि तन्हा ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये मोबाइल सिम खरीदी व उसका प्रयोग चक्का जाम करने, दंगों का षड्यंत्र रचने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने में किया।