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फर्जी क्रेडिट कार्ड से धोखाधड़ी मामले तय अभियोग रद्द करने से इनकार

Fri, 02 Apr 2021 12:13 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 02 Apr 2021 12:13 AM IST
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high court refuses to set aside charges frame in cheating matter
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने फर्जी क्रेडिट कार्ड के जरिये आम लोगों व बैंक से धोखाधड़ी के आरोपी मनदीप गांधी को राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया। अदालत ने उसके खिलाफ तय अभियोग रद्द करने की मांग खारिज कर दी। आरोपी पर क्रेडिट कार्ड के भुगतान करने में सहायता करने पर 30 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप है।
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न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अपने फैसले में कहा कि पेश दस्तावेज व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी क्लोन किए क्रेडिट कार्ड से लोगों के साथ धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के संपर्क में था। आरोपी पर गंभीर आरोप है और ट्रायल कोर्ट के अभियोग तय करने संबंधी फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
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अदालत ने आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि वह भुगतान के लेनदेन में लिप्त नहीं था। अदालत ने कहा कि वह मामले में लिप्त था या नहीं यह ट्रायल का मामला है। ऐसे में अभियोग को चुनौती याचिका खारिज करते हैं।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार फर्जी क्रेडिट कार्ड के जरिये धोखाधड़ी करने के मामले में पुलिस ने 22 फरवरी 2003 को आरोपी मयंक गर्ग, शरीफ अहमद व अजय तनेता को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद पता चला कि उन्हें आरोपी मुकेश, जगदीश चंद्र, अलीम अहमद इन्हें दुकानदारों व अन्य क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करने वाले लोगों का मूल डाटा उपलब्ध करवाते थे।
इसके बाद आरोपी क्रेडिट कार्ड का क्लोन तैयार कर मदनगीर इलाके में दुकान करने वाले मनदीप गांधी से संपर्क कर उसकी दुकान से खरीददारी दिखाकर पैसे ले लेते थे। इसकी एवज में मनदीप मूल राशि का 30 प्रतिशत बतौर कमीशन लेता था।

इसी के तहत उसने 13 जनवरी 2013 को आरबी संतोष नाम के व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड से 48000 रुपये की फर्जी बिल तैयार कर खरीददारी दिखाई और 18 हजार रुपये कमीशन के वसूले। इसी प्रकार गिरोह अन्य लोगों के साथ मिलकर धोखाधड़ी करते थे। पुलिस ने मामले में कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया था। आरोपी मनदीप ने तर्क रखा कि ट्रायल कोर्ट ने अभियोग तय करते हुए हर आरोपी की अलग भूमिका तय नहीं की बल्कि सोच विचार के निर्णय सुना दिया जो कानून के अनुसार ठीक नहीं है।
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