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एनडीएमसी के चार सदस्यों को नामित नहीं करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब तलब
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने सोमवार को नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) के चार सदस्यों को नामित नहीं करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने उक्त नोटिस एनडीएमसी क्षेत्र के दो निवासियों गंगाराम व पवन थपलियाल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र के अलावा दिल्ली सरकार और एनडीएमसी को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 12 जनवरी 2022 तय की है।
अदालत के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अमित साहनी ने तर्क दिया कि भले ही नई दिल्ली नगर अधिनियम, 1994 स्पष्ट रूप से कहता है कि परिषद में 13 सदस्य होने चाहिए, लेकिन एनडीएमसी केवल 9 सदस्यों के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा एनडीएमसी अधिनियम, 1994 की धारा 4(1)(डी) के तहत अनिवार्य होने के बावजूद केंद्र सरकार ने एनडीएमसी के 4 सदस्यों को नामित नहीं किया है।
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हालांकि सुनवाई के दौरान याचिका पर केंद्र के वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिका को वर्तमान रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और याचिकाकर्ता को जनहित याचिका दायर करनी चाहिए थी। वहीं याची के अधिवक्ता अमित साहनी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता भी पीड़ित पक्ष हैं क्योंकि याचिकाकर्ता भी एनडीएमसी क्षेत्र के निवासी हैं।
अदालत ने भी केंद्र के अधिवक्ता के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता एनडीएमसी क्षेत्र के निवासी हैं। इसलिए वे इच्छुक पार्टी हैं और इस संदर्भ में जनहित याचिका की जरूरत नहीं। अदालत ने कहा कि हमें यह देखने की जरूरत है कि धारा 4 केंद्र सरकार द्वारा सदस्यों के नामांकन के बारे में क्या अनिवार्य करती है?
दूसरी तरफ एनडीएमसी के वकील ने कहा कि एनडीएमसी अच्छी तरह से काम कर रहा है। याची के अधिवक्ता साहनी ने अदालत को बताया कि एनडीएमसी में कुल 13 सदस्य होते हैं। इनमें से चार सदस्यों को केंद्र सरकार, दिल्ली की सलाह से नियुक्त करती है।
इन पदों पर डॉक्टर, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यवसायी, वित्तीय सलाहकार इत्यादि क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने पर बतौर सदस्य नामित किया जाता है। पिछले दो वर्ष से उक्त चार पद रिक्त ही नहीं है बल्कि उपचेयरमैन का पद भी रिक्त है। ऐसे में एनडीएमसी का कामकाज सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा। तय नियमों का उल्लंघन हो रहा है।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार की सलाह पर जल्द उक्त पदों को भरने का निर्देेश दिया जाए ताकि एनडीएमसी में कामकाज सुचारु रूप से हो सके।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र के अलावा दिल्ली सरकार और एनडीएमसी को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 12 जनवरी 2022 तय की है।
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अदालत के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अमित साहनी ने तर्क दिया कि भले ही नई दिल्ली नगर अधिनियम, 1994 स्पष्ट रूप से कहता है कि परिषद में 13 सदस्य होने चाहिए, लेकिन एनडीएमसी केवल 9 सदस्यों के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा एनडीएमसी अधिनियम, 1994 की धारा 4(1)(डी) के तहत अनिवार्य होने के बावजूद केंद्र सरकार ने एनडीएमसी के 4 सदस्यों को नामित नहीं किया है।
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हालांकि सुनवाई के दौरान याचिका पर केंद्र के वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिका को वर्तमान रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और याचिकाकर्ता को जनहित याचिका दायर करनी चाहिए थी। वहीं याची के अधिवक्ता अमित साहनी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता भी पीड़ित पक्ष हैं क्योंकि याचिकाकर्ता भी एनडीएमसी क्षेत्र के निवासी हैं।
अदालत ने भी केंद्र के अधिवक्ता के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता एनडीएमसी क्षेत्र के निवासी हैं। इसलिए वे इच्छुक पार्टी हैं और इस संदर्भ में जनहित याचिका की जरूरत नहीं। अदालत ने कहा कि हमें यह देखने की जरूरत है कि धारा 4 केंद्र सरकार द्वारा सदस्यों के नामांकन के बारे में क्या अनिवार्य करती है?
दूसरी तरफ एनडीएमसी के वकील ने कहा कि एनडीएमसी अच्छी तरह से काम कर रहा है। याची के अधिवक्ता साहनी ने अदालत को बताया कि एनडीएमसी में कुल 13 सदस्य होते हैं। इनमें से चार सदस्यों को केंद्र सरकार, दिल्ली की सलाह से नियुक्त करती है।
इन पदों पर डॉक्टर, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यवसायी, वित्तीय सलाहकार इत्यादि क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने पर बतौर सदस्य नामित किया जाता है। पिछले दो वर्ष से उक्त चार पद रिक्त ही नहीं है बल्कि उपचेयरमैन का पद भी रिक्त है। ऐसे में एनडीएमसी का कामकाज सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा। तय नियमों का उल्लंघन हो रहा है।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार की सलाह पर जल्द उक्त पदों को भरने का निर्देेश दिया जाए ताकि एनडीएमसी में कामकाज सुचारु रूप से हो सके।