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बाल भिक्षावृत्ति: केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस

Fri, 13 Aug 2021 11:34 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 13 Aug 2021 11:34 PM IST
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high  court issues notice to center and Delhi government over child begging
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने राजधानी और उसके आसपास बाल भिक्षावृत्ति को रोकने और उन बच्चों के पुनर्वास करने के संबंध में दायर जनहित याचिका पर दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर), केंद्र सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बच्चों से भीख मंगवाने के लिए माफिया सक्रिय है और बच्चों के शोषण के अलावा युवतियों का भी यौन शोषण भी किया जा रहा है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने मामले में डीसीपीसीआर और केंद्र सरकार के अलावा दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग और दिल्ली के शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 सितंबर तय की है।
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यह याचिका अधिवक्ता अजय गौतम ने दायर की है। इसमें बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2005 में तय प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों से भीख मंगवाने के लिए माफिया सक्रिय है और वह भीख मांगने के लिए मासूम बच्चों का अपहरण, ट्रेन में अपहरण कर उनको प्रताड़ित कर भीख मांगने के लिए मजबूर करते हैं। इसे रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे।
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माफिया द्वारा युवतियों के शोषण का आरोप
उन्होंने कहा कि माफिया युवतियों को भी भीख मांगने के लिए मजबूर करने के अलावा उनका यौन शोषण कर रहा है। उन्होंने कहा राजधानी की हर लालबत्ती, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, धार्मिक स्थलों, स्कूल कॉलेजों, मार्केट इत्यादि में बच्चों व युवतियों को भीख मांगते हुए देखा जा सकता है। माफिया बच्चों के प्रति आम लोगों की सहानुभूति का फायदा उठाकर ऐसा करता है।
याची ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के नजदीक पुराना किला, इंडिया गेट के आसपास भी भीख मांगने वालों को देखा जा सकता है।
पुलिस को उचित कदम उठाने का निर्देश देने का आग्रह
याची ने अदालत से सभी संबंधित विभागों को भीख मांगने वाले बेसहारा बच्चों की पहचान कर उनके पुनर्वास का निर्देश देने की मांग की है। इसके अलावा सभी थानों के एसएचओ को निर्देश देने की मांग की है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में बच्चों की भीख मांगने से रोकने के लिए उचित कदम उठाएं। इस संबंध में एक बीट अधिकारी या डिवीजन अधिकारी की नियुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कोई बच्चा स्वयं अपनी इच्छा से भीख नहीं मांगता है।

बच्चों को नशीला पदार्थ देने का आरोप
उन्होंने कहा सहानुभूति हासिल करने के लिए छोटे बच्चों को जानबूझकर चोट पहुंचाई जाती है। वहीं सर्दियों में देखा जाता है कि युवतियां सहानुभूति हासिल करने के लिए बिना कपड़ों के बच्चों को लेकर भीख मांगती हैं। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि सहानुभूति हासिल करने के लिए माफिया और ये लड़कियां उन छोटे बच्चों को नशीली दवा देती हैं। हालांकि इससे 9 से 12 महीने के बच्चों का जीवन खतरे में पड़ता है।
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